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धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला। उनके कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई ऐसी पहलें की गईं जिनका उद्देश्य नई शिक्षा नीति को लागू करना, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना, भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना और उच्च शिक्षा में शोध एवं नवाचार को मजबूत करना था। हालांकि उनके कार्यकाल के अंतिम दौर में परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों ने उनकी उपलब्धियों पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन को गति देना माना जाता है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यालयी शिक्षा में लचीलापन, मातृभाषा में पढ़ाई, बहुविषयक शिक्षा तथा कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया। विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी नई व्यवस्था के अनुरूप अनेक सुधार लागू किए गए।

धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय भाषाओं में तकनीकी और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने का विशेष प्रयास किया। इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में कई कदम उठाए गए, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच मिल सके।

उनके कार्यकाल में डिजिटल शिक्षा को भी नई गति मिली। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विस्तार पर बल दिया गया ताकि दूरदराज़ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया। आईआईटी, आईआईएम और अन्य प्रमुख संस्थानों में अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने, उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहलें की गईं। हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उन्होंने भारत को अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और उद्यमिता के लिए भी तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप शिक्षा और कौशल विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया गया।

हालांकि उनके कार्यकाल का अंतिम चरण प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के कारण विवादों में रहा। इन घटनाओं के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बावजूद उनके कार्यकाल की कई नीतिगत पहलें आने वाले वर्षों में भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती रहेंगी।

धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल उपलब्धियों और चुनौतियों, दोनों का मिश्रण रहा। एक ओर उन्होंने नई शिक्षा नीति, भारतीय भाषाओं, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और शोध को नई दिशा देने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों ने उनके कार्यकाल को कठिन दौर में पहुंचा दिया। भारतीय शिक्षा के इतिहास में उनका कार्यकाल सुधारों और जवाबदेही—दोनों दृष्टियों से लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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