भारत में गरीबी कम होने पर BoldVoices हिंदी समाचार थंबनेल, भारतीय परिवार, तिरंगा और विश्व बैंक का प्रतीक
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भारत का ऐतिहासिक बदलाव: 12 वर्षों में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, विश्व बैंक ने की पुष्टि

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अपडेट: 1 नवंबर 2026 | रात 10:40 बजे IST

भारत की विकास यात्रा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की Poverty and Equity Brief के अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच अनुमानित 49.6 करोड़ भारतीय निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी रेखा से ऊपर आए। यह उपलब्धि बताती है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत की अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक कल्याण व्यवस्था और रोजगार के अवसरों ने करोड़ों लोगों के जीवन में कितना बड़ा बदलाव लाने में योगदान दिया है।

यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि भारत में हो रहे व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की तस्वीर है। आर्थिक विकास, परिवारों की बढ़ती उपभोग क्षमता, रोजगार में वृद्धि और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुँचने जैसे कारकों ने इस बदलाव में भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि गर्व का विषय है और साथ ही भारत के सामने अगला लक्ष्य भी रखती है—गरीबी से बाहर आए परिवारों को स्थायी आय, बेहतर रोजगार और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना।

विश्व बैंक के आँकड़ों में भारत की बड़ी उपलब्धि

विश्व बैंक के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच लगभग 496 मिलियन यानी 49.6 करोड़ लोग प्रतिदिन 4.20 डॉलर की गरीबी सीमा से ऊपर आए। यह सीमा 2021 Purchasing Power Parity (PPP) के आधार पर निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित की गई है। इस मानक पर भारत की गरीबी दर वर्ष 2011 में 57.7 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई।

अत्यधिक गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति दर्ज की। विश्व बैंक की अलग 3 डॉलर प्रतिदिन वाली अंतरराष्ट्रीय Extreme Poverty Line के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2011 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023 में 2.6 प्रतिशत रह गई।

ये आँकड़े household consumption surveys और World Bank की पद्धति पर आधारित अनुमान हैं, न कि हर व्यक्ति की अलग-अलग गणना। 2023 में $4.20 वाली सीमा पर ग्रामीण गरीबी दर 19.3% और शहरी दर 8.6% थी; अलग $8.30 upper-middle-income line के नीचे लगभग 80% आबादी थी। विश्व बैंक ने सावधानी भी बताई है: 2022–23 से 2023–24 के बीच गरीबी में दर्ज बड़ी गिरावट में वास्तविक कल्याण सुधार के साथ बेहतर measurement का योगदान भी हो सकता है। सर्वेक्षण अमीर परिवारों के उपभोग को पूरी तरह दर्ज नहीं कर पाते, इसलिए inequality कम दिखाई दे सकती है। इसीलिए 49.6 करोड़ का आँकड़ा $4.20 की तय अंतरराष्ट्रीय सीमा से ऊपर जाने वाले लोगों का अनुमान है; इसे extreme poverty से बाहर आने या हर परिवार की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

आर्थिक विकास का लाभ आम परिवारों तक पहुँचा

किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का वास्तविक महत्व तब होता है, जब उसका लाभ आम नागरिकों के जीवन में दिखाई दे। विश्व बैंक ने घरेलू उपभोग में वृद्धि को गरीबी कम होने का एक प्रमुख कारण बताया है। जब परिवार भोजन, आवास, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं पर अधिक खर्च करने में सक्षम होते हैं, तो उनके गरीबी रेखा से नीचे रहने की संभावना कम होती है।

भारत में आर्थिक विस्तार के साथ सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच भी बढ़ी है। खाद्य सहायता, आवश्यक सेवाओं तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनते हैं, जिनकी आय अनियमित होती है या जो मौसमी रोजगार पर निर्भर रहते हैं।

भारत के डिजिटल और वित्तीय ढाँचे के विस्तार ने भी नागरिकों के लिए बैंकिंग, भुगतान और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच के नए रास्ते खोले हैं। यह बदलाव बताता है कि आर्थिक विकास और प्रभावी सरकारी व्यवस्था जब एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, तो उनका लाभ समाज के बड़े वर्ग तक पहुँच सकता है।

रोजगार में वृद्धि और महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी

भारत की गरीबी कम होने की कहानी में रोजगार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार प्राप्त लोगों की संख्या में लगभग 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई। यह इसी अवधि में कामकाजी आयु की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी थी। रिपोर्ट में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भुगतान वाले काम में भागीदारी को भी एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया गया है।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी केवल परिवार की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे परिवारों की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होती है, स्थानीय बाजारों में गतिविधियाँ बढ़ती हैं और देश की उत्पादक क्षमता का विस्तार होता है। आने वाले वर्षों में महिलाओं के लिए बेहतर वेतन, कौशल प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, सुरक्षित परिवहन और रोजगार के अवसर बढ़ाना इस प्रगति को और मजबूत कर सकता है।

भारत के पास विनिर्माण, आधुनिक सेवाओं, निर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे उद्योगों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने का अवसर है।

भारत की प्रगति के साथ साझा समृद्धि का अगला लक्ष्य

विश्व बैंक की रिपोर्ट आय में असमानता की ओर भी ध्यान दिलाती है। इसके अनुसार, सबसे अधिक कमाने वाले 10 प्रतिशत श्रमिकों की मध्य आय, सबसे कम कमाने वाले 10 प्रतिशत श्रमिकों की तुलना में लगभग 13 गुना है। यह अंतर भारत की गरीबी कम करने की उपलब्धि को कम नहीं करता, बल्कि बताता है कि विकास के अगले चरण में अधिक से अधिक लोगों तक आर्थिक अवसर पहुँचाना कितना जरूरी है।

रोजगार की संख्या बढ़ने के साथ बेहतर वेतन, स्थायी काम, सुरक्षित कार्यस्थल और कौशल विकास पर भी ध्यान देना होगा। छोटे कारोबारों को तकनीक, सस्ती वित्तीय सहायता, बेहतर परिवहन और बड़े बाजारों तक पहुँच उपलब्ध कराना भी जरूरी है। भारत का लक्ष्य केवल लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाना नहीं, बल्कि उन्हें बचत करने, आपात परिस्थितियों का सामना करने और भविष्य की बेहतर योजना बनाने में सक्षम बनाना होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक के क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावना

भारत में गरीबी कम होने की प्रगति सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं रही है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी गरीबी की श्रेणी में आने वाली लगभग 57 प्रतिशत आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले व्यापक क्षेत्र में केंद्रित है। यह क्षेत्र भारत के विकास के अगले चरण के लिए बड़ी संभावना प्रस्तुत करता है।

यहाँ ग्रामीण सड़कों, सिंचाई, बिजली, बेहतर स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और गैर-कृषि रोजगार के अवसरों को मजबूत करने से महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। खाद्य प्रसंस्करण, छोटे विनिर्माण उद्योग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और महिला उद्यमिता स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा सकते हैं। इससे लोगों को अपने ही क्षेत्र में आय के अवसर मिलेंगे और मौसमी कृषि या मजबूरी में होने वाले पलायन पर निर्भरता कम हो सकती है।

भारत की विविधता को देखते हुए हर राज्य और जिले के लिए अलग विकास रणनीति की आवश्यकता है। राष्ट्रीय विकास का वास्तविक लाभ तभी व्यापक होगा, जब छोटे शहरों और गाँवों तक भी अवसर पहुँचेंगे।

केवल आय नहीं, जीवन की बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार

गरीबी का अर्थ केवल कम आय नहीं है। बहुआयामी गरीबी के आकलन में पोषण, शिक्षा, स्वच्छता, आवास और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाता है। भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी संबंधी अनुमानों में भी पिछले दो दशकों के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

हालाँकि, बहुआयामी गरीबी के आँकड़ों और विश्व बैंक की 3 डॉलर तथा 4.20 डॉलर वाली गरीबी सीमाओं को एक ही पैमाना नहीं समझना चाहिए। दोनों की परिभाषा, संकेतक और गणना पद्धति अलग हैं। इन सभी संकेतकों को साथ देखने से भारत के विकास की व्यापक तस्वीर सामने आती है—एक ओर परिवारों की उपभोग क्षमता बढ़ी है, तो दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच में भी सुधार हुआ है।

विश्व बैंक का भविष्य को लेकर अनुमान

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी सीमा पर भारत की गरीबी दर 2026 में अनुमानित 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। यह भविष्य का अनुमान है, सुनिश्चित परिणाम नहीं। इसे हासिल करने के लिए आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, परिवारों की आय, महँगाई और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँचाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

भारत के पास आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता, पोषण, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल प्रशिक्षण, कृषि उत्पादकता और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करके इस प्रगति को आगे बढ़ाने का अवसर है। बुनियादी ढाँचे और मानव संसाधन में निवेश से अधिक नागरिक देश की आर्थिक वृद्धि में भागीदार बन सकते हैं।

भारत की उपलब्धि, और उससे भी बड़े भविष्य की तैयारी

विश्व बैंक का यह अनुमान कि 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी सीमा से ऊपर आए, भारत की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अत्यधिक गरीबी की दर का घटकर 2.6 प्रतिशत रह जाना भी एक बड़ी उपलब्धि है। ये परिणाम भारत में हुए व्यापक आर्थिक और सामाजिक बदलाव को दर्शाते हैं।

भारत की कहानी केवल गरीबी रेखा पार करने वाले लोगों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसे देश की कहानी है जो बड़े पैमाने पर अवसरों का विस्तार कर रहा है, परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने का प्रयास कर रहा है और विकास का लाभ अधिक नागरिकों तक पहुँचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब अगला लक्ष्य बेहतर रोजगार, बढ़ती वास्तविक आय, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए अधिक अवसर होना चाहिए।

भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब आवश्यकता है कि देश की समृद्धि केवल कुछ बड़े शहरों या चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के हर राज्य, जिले और गाँव के परिवारों के जीवन में दिखाई दे।

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