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पंजाब के मोगा में ED की तलाशी अभियान का संपादकीय चित्रण।

मोगा में AAP विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा से जुड़े सात ठिकानों पर ED की रेड, जमीन मुआवजा मामले में जांच

Curated by KS Randhawa, Ludhiana Punjab

पंजाब के मोगा से आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा से जुड़े सात परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सरकारी जमीन के कथित फर्जी इंतकाल और मुआवजे के कथित गलत भुगतान से जुड़े Money Laundering जांच के तहत की गई।

किन जगहों पर हुई तलाशी?

अधिकारियों के अनुसार, ED की टीमों ने मोगा में विधायक के आवास सहित उनके पति डॉ. राकेश अरोड़ा, परिवार के सदस्यों और अन्य सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। तलाशी के दायरे में डॉ. राकेश अरोड़ा से जुड़े एक नशा मुक्ति एवं पुनर्वास अस्पताल का परिसर भी शामिल बताया गया है। कुल सात स्थानों पर कार्रवाई की गई।

डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा मोगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और पंजाब में AAP की महिला विंग की अध्यक्ष भी हैं। पार्टी ने उन्हें 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए मोगा से दोबारा उम्मीदवार घोषित किया है।

किस मामले की जांच कर रही है ED?

यह जांच पंजाब पुलिस की 16 जून 2024 को दर्ज FIR से जुड़ी है। मामले में मोगा जिले में National Highway 754A के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन के कथित फर्जी इंतकाल और मुआवजे के कथित गलत वितरण के आरोप शामिल हैं। ED इस मामले में Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत वित्तीय लेन-देन और कथित Money Trail की जांच कर रही है।

यह समझना जरूरी है कि तलाशी एक जांच प्रक्रिया है, दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं। किसी परिसर पर छापा पड़ने मात्र से वहां से जुड़े व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।

मूल FIR में विधायक का नाम था?

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब पुलिस की मूल FIR में डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया था। ED की कार्रवाई में उनसे और उनके परिवार से जुड़े परिसरों की तलाशी शामिल है। जांच में प्रत्येक व्यक्ति की कानूनी स्थिति अलग-अलग तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही तय होगी।

AAP कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, राजनीतिक आरोप

तलाशी की खबर के बाद AAP कार्यकर्ता मोगा में विधायक के आवास के बाहर जमा हुए और केंद्र की BJP सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। ये AAP समर्थकों के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें जांच में साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कार्रवाई का समय भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना है, क्योंकि पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो रही हैं और AAP ने अरोड़ा को मोगा से फिर उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, चुनावी संदर्भ अपने आप में जांच के कारण या निष्कर्ष को साबित नहीं करता।

अब आगे क्या होगा?

आगे की प्रक्रिया में ED द्वारा जब्त या जुटाए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच, कथित वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ शामिल हो सकती है। एजेंसी की ओर से आगे कोई आधिकारिक जानकारी आती है तो मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।

इस मामले में दो पहलुओं को अलग रखना जरूरी है—एक, सरकारी जमीन और मुआवजे से जुड़े आरोपों की कानूनी जांच; दूसरा, जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के दावे। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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