Jio and Reliance logo-based thumbnail for the Hindi article about Mukesh Ambani becoming emotional during Anant Ambani's speech at the Jio Platforms listing ceremony

मुकेश अंबानी की आंखें हुईं नम, बेटे अनंत के भाषण ने याद दिलाई धीरूभाई अंबानी की विरासत

दिनांक: 31 अक्टूबर 2026
Curated by the team of Boldvoices

जियो प्लेटफॉर्म्स की Stock Market Listing का दिन रिलायंस परिवार के लिए केवल एक कारोबारी उपलब्धि नहीं था। यह उस लंबी यात्रा की यादों, परिवार की विरासत और अगली पीढ़ी को सौंपी जा रही जिम्मेदारी का भावुक अवसर भी बन गया। 28 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित Listing Ceremony के दौरान अनंत अंबानी और ईशा अंबानी ने जब जियो की कहानी और अपने परिवार के योगदान का जिक्र किया, तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी भावुक दिखाई दिए। उन्हें अपनी आंखें पोंछते हुए देखा गया।

इस पल ने समारोह को सिर्फ शेयर बाजार की बड़ी घटना से आगे बढ़ाकर एक ऐसी पारिवारिक कहानी बना दिया, जिसमें धीरूभाई अंबानी के शुरुआती संघर्ष, मुकेश अंबानी की दूरदृष्टि और नई पीढ़ी की भूमिका एक साथ दिखाई दी।

अनंत अंबानी ने भाषण की शुरुआत आभार से की

अनंत अंबानी ने अपने संबोधन में सबसे पहले उन लाखों भारतीयों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने जियो पर भरोसा किया और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाया। उन्होंने Listing Ceremony की Exchange Bell को मंदिर की घंटी से जोड़ते हुए कहा कि उनके लिए Business पूजा के समान है और पूजा के बाद प्रसाद सबके साथ साझा किया जाता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “Today, Jio is shared with India.”

उनके संदेश का अर्थ साफ था—जियो की सफलता को केवल कंपनी या उसके प्रमोटर्स की उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। इसमें ग्राहकों, कर्मचारियों, भागीदारों और उन करोड़ों लोगों का योगदान है जिन्होंने इस नेटवर्क को अपनाया। अनंत ने जियो के लगभग 53 करोड़ ग्राहकों को इस यात्रा का अहम आधार बताया।

धीरूभाई अंबानी के संघर्ष को किया याद

अनंत ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी की यात्रा का उल्लेख करते हुए गुजरात के चोरवाड़ के एक साधारण घर से निकले उस सपने को याद किया, जिसने आगे चलकर एक बड़े कारोबारी समूह का रूप लिया। उन्होंने धीरूभाई के शुरुआती दिनों का जिक्र किया, जब वे अदन में पेट्रोल पंप पर काम करते थे और उनके पास न बड़ी पूंजी थी, न कोई खास पहचान। अनंत के मुताबिक, धीरूभाई ने यह विश्वास जगाया कि एक साधारण भारतीय भी असाधारण सपना देख सकता है।

इसके बाद उन्होंने अपने पिता मुकेश अंबानी की सोच को याद किया—भारत को किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए। अनंत ने जामनगर में विशाल Refinery के निर्माण को इसी सोच का उदाहरण बताया। उनके भाषण में यह बात उभरकर आई कि रिलायंस की हर पीढ़ी ने अपने समय की बड़ी चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की है।

जियो को भारत के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ा

अनंत ने जियो की उपलब्धि को केवल नेटवर्क, ग्राहकों या कारोबार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने डिजिटल कनेक्टिविटी के उन असर का उल्लेख किया जो आम लोगों की जिंदगी में दिखाई देते हैं—बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई, दूर रहने वाले परिवारों से Video Call, डिजिटल माध्यम से धार्मिक स्थलों के दर्शन, छोटे शहरों के Creators को दर्शक मिलना और जरूरत के समय डॉक्टरों तक पहुंच बनना।

उनके संबोधन में यह विचार भी था कि भारत के हर गांव और हर हाथ तक डिजिटल अवसर पहुंचना चाहिए। उन्होंने जियो के कर्मचारियों—टावरों पर कठिन मौसम में काम करने वाली Field Teams, Technicians, Engineers, Customer Service Staff, Store Teams और Retail Partners—का विशेष धन्यवाद किया। उनके अनुसार, जियो आज जिस मुकाम पर है, उसमें इन सभी लोगों की मेहनत शामिल है।

अनंत ने अपनी बहन ईशा और भाई आकाश के साथ साझा जिम्मेदारी की बात करते हुए तीनों को “three bodies but one soul” बताया। उन्होंने दादा के सपने, दादी के आशीर्वाद, पिता के मार्गदर्शन और मां नीता अंबानी से मिले विनम्रता व देखभाल के संस्कारों को परिवार की जड़ों के रूप में याद किया। उन्होंने Digital India की सोच और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के लिए भी आभार जताया तथा विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

ईशा अंबानी ने 1977 की याद से जोड़ा आज का दिन

ईशा अंबानी के संबोधन ने समारोह को एक और भावुक मोड़ दिया। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले परिवार के साथ भोजन के दौरान मुकेश अंबानी वर्ष 1977 के अपने दिनों को याद कर रहे थे। उस समय वे 20 वर्ष के थे और रिलायंस के पहले Public Offering से जुड़े काम में शामिल थे। ईशा ने याद दिलाया कि धीरूभाई अंबानी ने उस दौर में कंपनी को आम लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया था।

इस पुरानी याद और जियो की मौजूदा Listing के बीच एक दिलचस्प समानता थी। 1977 में रिलायंस ने आम निवेशकों को अपने साथ जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया था; अब जियो की Listing के साथ समूह का एक नया कारोबार सार्वजनिक बाजार के निवेशकों के सामने आया। ईशा ने इस सफर को केवल वित्तीय आंकड़ों की कहानी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि हर आंकड़े के पीछे एक ग्राहक है और जियो की असली ताकत उन लोगों का भरोसा है जिन्होंने इसे अपने घरों, दुकानों, कक्षाओं और रोजमर्रा की जिंदगी में जगह दी।

ईशा ने जियो की वित्तीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी ने लगभग 10 वर्षों में करीब 15.5 अरब डॉलर का Revenue और लगभग 8 अरब डॉलर की वास्तविक कमाई हासिल की। उन्होंने आकाश अंबानी की 13 वर्षों की मेहनत और जियो टीम के योगदान की सराहना की। अपने पिता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी ने बार-बार ऐसा भविष्य देखा, जिसे दूसरे लोग उस समय संभव नहीं मानते थे। उनके शब्दों में, अलग-अलग उद्योगों और दशकों के बावजूद भारत में विश्वास हमेशा एक जैसा रहा है।

मुकेश अंबानी क्यों हुए भावुक?

मुकेश अंबानी की भावुक प्रतिक्रिया को समारोह में कही गई बातों के संदर्भ में समझा जा सकता है। एक ओर अनंत ने दादा धीरूभाई से मिली प्रेरणा और पिता के मार्गदर्शन को याद किया, तो दूसरी ओर ईशा ने 1977 के उस दौर को सामने रखा जब मुकेश अंबानी अपने पिता के साथ रिलायंस के पहले Public Offering की यात्रा का हिस्सा बने थे। अब वही परिवार जियो की Listing के साथ एक नए पड़ाव पर खड़ा था।

बच्चों को सार्वजनिक मंच से परिवार के संघर्ष, उपलब्धियों और मूल्यों को सम्मान देते देखना किसी भी माता-पिता के लिए भावुक क्षण हो सकता है। यहां यह पल उस कारोबारी विरासत से भी जुड़ा था जिसे धीरूभाई अंबानी ने शुरू किया, मुकेश अंबानी ने विस्तार दिया और अब अगली पीढ़ी आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रही है।

Jio Platforms की Listing: निवेशकों के लिए भी बड़ा दिन

समारोह का महत्व भावनात्मक पहलू तक सीमित नहीं था। जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर लगभग ₹1,358–₹1,359 के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। इसका IPO Issue Price ₹1,119 प्रति शेयर था, यानी Listing करीब 21.36% के Premium पर हुई। लगभग ₹30,213 करोड़ का यह IPO भारतीय बाजार की बड़ी सार्वजनिक पेशकशों में शामिल रहा।

इस Listing को रिलायंस समूह के लिए करीब दो दशकों में एक महत्वपूर्ण बाजार पड़ाव के रूप में देखा गया। निवेशकों को जियो के डिजिटल कारोबार में सीधे भागीदारी का अवसर मिला। हालांकि Listing पर मिला Premium भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होता। निवेशकों के लिए कंपनी की आय, मुनाफा, पूंजीगत खर्च, प्रतिस्पर्धा, नियामकीय माहौल और आगे की वृद्धि पर नजर रखना जरूरी रहेगा।

परिवार की विरासत से आगे भारत के डिजिटल भविष्य तक

अनंत और ईशा के भाषणों में एक साझा संदेश दिखाई दिया—रिलायंस की कहानी को केवल एक परिवार या एक कंपनी की सफलता के रूप में नहीं, बल्कि ग्राहकों, कर्मचारियों, निवेशकों और देश के साथ जुड़े सफर के रूप में देखा जाना चाहिए। अनंत ने जियो को भारत के साथ साझा उपलब्धि बताया, जबकि ईशा ने निवेशकों और ग्राहकों के भरोसे को आगे भी ईमानदारी से निभाने का संकल्प दोहराया।

मुकेश अंबानी की नम आंखें इस समारोह की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गईं। जियो की Listing ने बाजार में एक नया अध्याय खोला, लेकिन उस दिन मंच पर सुनाई दी कहानी इससे कहीं पुरानी थी—एक साधारण शुरुआत, बड़े सपने, पीढ़ियों की मेहनत और उस विरासत को आगे ले जाने का संकल्प।

यह लेख समारोह में दिए गए संबोधनों और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। भाषणों का सार हिंदी में प्रस्तुत है; इसे दोनों वक्ताओं के पूरे भाषण का शब्दशः अनुवाद न समझें।

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