नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती हवा पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों से पूछा कि प्रदूषण रोकने के लिए अभी कौन-से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा और सुझाव लंबे समय से दिए जा रहे हैं, लेकिन AQI अब 400 के करीब पहुंच रहा है। अदालत ने जोर दिया कि पहले मौजूदा गंभीर स्थिति को सुधारने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
शुक्रवार को दिल्ली का औसत AQI 391 बताया गया। शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर हवा “गंभीर” श्रेणी में दर्ज हुई। रोहिणी में AQI 475 और IIT दिल्ली में 472 तक पहुंचा। इस तरह औसत स्तर 400 से नीचे था, जबकि कई इलाकों में हवा उससे भी ज्यादा खराब थी।
वाहनों का धुआं और सड़क का जाम चिंता का विषय
पीठ ने दिल्ली और आसपास के शहरों को जोड़ने वाली सड़कों पर भारी वाहन आवाजाही को प्रदूषण का बड़ा कारण बताया। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या सार्वजनिक परिवहन पर्याप्त है, ताकि लोग निजी गाड़ियों पर कम निर्भर हों। सुनवाई में वाहनों से निकलने वाले धुएं, लगातार जाम और NCR से रोज़ आने-जाने वाले यातायात पर चर्चा हुई।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है। पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए सुझाव दिए गए—जैसे फसल-अवशेष की खरीद का दाम पहले से तय करना और ग्राम पंचायतों के जरिए किसानों को मशीनें उपलब्ध कराना। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सुझाव संबंधित मंत्रालय के सामने रखे जाएंगे।
सरकार ने किन उपायों की जानकारी दी?
सरकार की ओर से निर्माण और तोड़फोड़ की धूल, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और पराली जैसे अलग-अलग स्रोतों पर किए जा रहे कामों का ब्यौरा अदालत में रखा गया। बताए गए उपायों में कुछ वाहनों पर पाबंदियां, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों की निगरानी और धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ शिकायतों के आधार पर कार्रवाई शामिल है।
अदालत ने इन कदमों का विवरण दर्ज किया और अधिकारियों से आगे की प्रगति बताने को कहा। सुनवाई में स्कूलों को बंद करने या सभी विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड कक्षाएं लागू करने की मांग भी उठी। पीठ ने तत्काल ऐसा कोई आदेश नहीं दिया और इस तरह के फैसलों में विशेषज्ञों की राय पर विचार करने की बात कही। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होने की जानकारी दी गई है।
प्रदूषण का असर आम लोगों पर
सुनवाई में पीठ ने कहा कि प्रदूषण की मार उन लोगों पर भी पड़ती है जिनके पास उससे बचने के साधन कम हैं। अदालत ने त्योहारों और मौसमी काम से जुड़ी आजीविका का पहलू भी उठाया। बहस का केंद्र यह था कि प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए असरदार कदम उठें और रोज़गार पर निर्भर लोगों की स्थिति भी ध्यान में रखी जाए।
सुनवाई का सार: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई और प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर केंद्रित उपायों की जरूरत पर जोर दिया। इस सुनवाई में स्कूलों के लिए नई पाबंदी का आदेश नहीं हुआ; आगे के कदमों पर अगली तारीख में विचार होगा।
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