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माँ कूष्मांडा पर BoldVoices न्यूज़ थंबनेल: सृष्टि की ऊर्जा, पूजा विधि और महत्व।

4th Navratr – Maa Kooshmanda

चतुर्थ नवरात्र : माँ कूष्मांडा

चतुर्थ नवरात्र : माँ कूष्मांडा

चतुर्थ नवरात्र के दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माता कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार माना जाता है। कहा जाता है कि जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, तब माँ कूष्मांडा ने अपने कुम्हड़े जैसे रूप से इस universe की रचना की।

पूजा विधि

  1. स्थान की सफाई: पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें।
  2. कलश स्थापना: एक कलश में जल भरकर उसकी पूजा करें।
  3. धूप और दीप: धूप, दीप जलाएं और माँ का ध्यान करें।
  4. नैवेद्य: उनकी पसंद के अनुसार फल व मिठाई का भोग अर्पित करें।
  5. अभिषेक: माँ को दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक करें।
  6. मंत्र जप: ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’ इस मंत्र का जाप करें।

विशेष ध्यान

माता कूष्मांडा का ध्यान करते समय ध्यान रखें कि आप मन की शुद्धता के साथ पूजा करें। माँ से सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना करें।

उपासना का महत्व

माँ कूष्मांडा की उपासना से मन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। नवरात्रि के इस दिन का विशेष महत्व है, इसलिए इसे धूमधाम से मनाना चाहिए।

माँ कूष्मांडा आप सभी को आशीर्वाद दें, यही प्रार्थना है।

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