आध्यात्मिक प्रेरणादायक लेख

लेखक: Team of Boldvoices | दिनांक: 08 सितम्बर 2025

अक्सर लोग कहते हैं – “जीवन तो पहले से ही मस्त है, हमें किसी सत्संग की ज़रूरत क्यों है?” सच यह है कि जीवन में सुख, आनंद और मस्ती क्षणिक हो सकती है, लेकिन सत्संग हमें उस स्थायी शांति और आनंद का मार्ग दिखाता है जो कभी खत्म नहीं होता।

दुनिया की मस्ती बाहर की परिस्थितियों पर निर्भर होती है। अच्छा खाना, अच्छा संगीत, दोस्तों के साथ समय बिताना– यह सब हमें क्षणिक सुख देता है। लेकिन जब हालात बदलते हैं, समस्याएँ आती हैं, तब वही मस्ती खो जाती है और मनुष्य बेचैन हो जाता है। यहाँ सत्संग की आवश्यकता सामने आती है। सत्संग हमें यह सिखाता है कि असली आनंद बाहरी चीज़ों से नहीं, बल्कि भीतर के आत्मिक अनुभव से आता है।

सत्संग आत्मा को जागृत करता है और हमें यह समझाता है कि जीवन केवल मनोरंजन और भौतिक सुखों तक सीमित नहीं है। इंसान का जन्म केवल खाने-पीने, कमाने और मज़े करने के लिए नहीं हुआ, बल्कि अपने सच्चे स्वरूप को पहचानने के लिए हुआ है। जब हम सत्संग में बैठते हैं, तो संतों-महापुरुषों की वाणी से हमें आत्मिक जागरूकता मिलती है, जो जीवन को एक नई दिशा देती है।

सत्संग हमें अहंकार, स्वार्थ और नकारात्मक विचारों से मुक्त करता है। यह मन को हल्का बनाता है और हमें सिखाता है कि जीवन की सच्ची मस्ती तभी है जब हम हर परिस्थिति में शांत, संतुष्ट और कृतज्ञ रह सकें। असली मस्ती वही है, जो सुख-दुख, लाभ-हानि और उतार-चढ़ाव में भी बनी रहती है।

इसलिए, जीवन अगर आज मस्त लग भी रहा है, तो सत्संग इसे और गहरा बना देता है। सत्संग से मिली आध्यात्मिक समझ हमें यह एहसास कराती है कि क्षणिक मस्ती से परे एक अनंत आनंद है – और वही आनंद जीवन का असली उद्देश्य है।


One response to “जीवन मस्त है तो फिर सत्संग क्यों करें?”

  1. सच कहा, सत्संग से मानसिक संतुष्टि मिलती है

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