लेखक: Team of Boldvoices | दिनांक: 05 मई 2025

🔍 क्या हुआ है?
पाकिस्तान से संचालित एक साइबर ग्रुप, ‘Pakistan Cyber Force’, ने दावा किया है कि उन्होंने भारतीय रक्षा संस्थानों की वेबसाइट्स को हैक कर लिया है। इन हमलों में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) और मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं। हैकरों ने लगभग 10 GB डेटा चुराने का दावा किया है, जिसमें 1,600 से अधिक रक्षा कर्मियों की लॉगिन जानकारी और व्यक्तिगत विवरण होने की संभावना है।
🛡️ कौन-कौन सी वेबसाइट्स निशाने पर रहीं?
- मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES): संवेदनशील डेटा की चोरी का दावा।
- मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA): लगभग 10 GB डेटा चोरी होने का दावा।
- आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (AVNL): वेबसाइट को पाकिस्तानी झंडे और ‘अल खालिद’ टैंक की तस्वीर से डिफेस किया गया।
🚨 सरकार और सेना की प्रतिक्रिया
- AVNL की वेबसाइट को सुरक्षा जांच के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
- साइबर सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों की निगरानी कर रही हैं।
- डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
🔗 पृष्ठभूमि
यह साइबर हमला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सामने आया है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिनमें सिंधु जल संधि का निलंबन और वीज़ा सेवाओं का रोकना शामिल है।
📌 निष्कर्ष
यह घटना दर्शाती है कि आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़ा जा रहा है। भारत को अपनी साइबर सुरक्षा नीति को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि ऐसे डिजिटल हमलों से राष्ट्रीय सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सके।











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