April 22, 2025 | New Delhi | Curated By the team of Boldvoices.in

📌 क्या था बोफोर्स घोटाला?
बोफोर्स घोटाला भारत में हुआ एक बड़ा रक्षा घोटाला था, जिसमें आरोप लगे कि भारतीय सरकार ने तोप खरीदने के लिए रिश्वत दी और ली।
🧾 घटना का मुख्य बिंदु:
- साल: 1986
- सरकार: राजीव गांधी (कांग्रेस)
- सौदा: स्वीडन की कंपनी बोफोर्स AB से 410 फील्ड होवित्जर तोपें खरीदने का सौदा
- मूल्य: करीब ₹1,437 करोड़
- आरोप: सौदे में ₹64 करोड़ की रिश्वत दी गई थी कुछ भारतीय राजनेताओं, अधिकारियों और दलालों को
🔍 घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
- अप्रैल 1987 में स्वीडन के रेडियो ने पहली बार रिपोर्ट दी कि बोफोर्स कंपनी ने भारत में तोप बेचने के लिए रिश्वत दी।
- इसके बाद भारत में भी मीडिया (जैसे हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू) ने रिपोर्ट्स छापी।
- सबसे प्रमुख रिपोर्टर थे: चंद्रा स्वरूप और न राम
🧑⚖️ कौन-कौन शक के घेरे में आए?
- राजीव गांधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री): उन पर सीधे रिश्वत लेने का आरोप नहीं था, लेकिन कहा गया कि उन्होंने भ्रष्टाचार की अनदेखी की।
- ओत्तावियो क्वात्रोच्चि (इटली का दलाल): मुख्य आरोपी माना गया। उसके रिश्ते गांधी परिवार से जोड़े गए।
- कई नौकरशाह, सेना अधिकारी और राजनेता भी जांच के घेरे में आए।
🕵️♂️ CBI और जांच:
- CBI ने केस दर्ज किया: 1990 में
- कई सालों तक केस चला, लेकिन सबूतों की कमी, गवाहों की मौत और राजनीति के कारण मामला उलझता रहा।
- क्वात्रोच्चि भाग गया और उसे भारत नहीं लाया जा सका।
📉 राजनीतिक असर:
- यह घोटाला कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बना।
- 1989 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी की सरकार हार गई।
- जनता में भरोसा कमजोर हुआ।
✅ क्या हुआ नतीजा में?
- सालों की जांच और कोर्ट केस के बाद 2004 में CBI ने राजीव गांधी को क्लीन चिट दी।
- 2011 में केस को बंद कर दिया गया, लेकिन सच की पूरी तस्वीर कभी सामने नहीं आ सकी।
🧠 बोफोर्स घोटाला क्यों याद किया जाता है?
- यह भारत का पहला बड़ा “रक्षा सौदे में रिश्वत” घोटाला था।
- इसने पारदर्शिता, मीडिया की ताकत, और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर बहस छेड़ दी।
- आज भी जब रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार की बात होती है, बोफोर्स का नाम जरूर आता है।











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