मोक्ष और मुक्ति क्या है? आइए जानते हैं
भूमिका
मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है? यह प्रश्न युगों-युगों से दार्शनिकों, संतों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को प्रेरित करता आया है। भारतीय दर्शन में इस प्रश्न का उत्तर “मोक्ष” के रूप में दिया गया है। मोक्ष, जिसे मुक्ति भी कहा जाता है, आत्मा की परम स्वतंत्रता और संसार के बंधनों से मुक्ति का प्रतीक है।



मोक्ष की परिभाषा
संस्कृत शब्द “मोक्ष” का अर्थ है “मुक्ति” या “छुटकारा”। यह आत्मा की उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ वह जन्म और मृत्यु के चक्र (संसार) से मुक्त हो जाती है। हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म में मोक्ष की अलग-अलग व्याख्याएँ की गई हैं, लेकिन मूल भाव यही है कि यह आत्मा की अंतिम शुद्धि और ईश्वर या ब्रह्म के साथ एकरूपता की अवस्था है।
हिंदू दर्शन में मोक्ष
हिंदू धर्म में मोक्ष को पुरुषार्थ के चार लक्ष्यों में से एक माना गया है:
- धर्म – नैतिकता और कर्तव्य
- अर्थ – सांसारिक समृद्धि
- काम – इच्छाओं की पूर्ति
- मोक्ष – अंतिम मुक्ति
वेदांत दर्शन के अनुसार, आत्मा (जीवात्मा) और परमात्मा (ब्रह्म) के बीच कोई भेद नहीं है। जब आत्मा अपनी वास्तविकता को पहचान लेती है, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जैन और बौद्ध परंपरा में मोक्ष
जैन धर्म में मोक्ष का अर्थ है कर्मों से पूरी तरह मुक्त होकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करना। जैन साधु और तपस्वी अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अचौर्य के मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
बौद्ध धर्म में मोक्ष को “निर्वाण” कहा जाता है, जो समस्त इच्छाओं और मोह-माया से मुक्ति की अवस्था है। महात्मा बुद्ध ने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से निर्वाण प्राप्त करने की शिक्षा दी।
मोक्ष के मार्ग
हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के चार प्रमुख मार्ग बताए गए हैं:
- ज्ञान योग – आत्मज्ञान (ब्रह्मज्ञान) द्वारा मुक्ति (केवल सतगुरु कृपा द्वारा ही संभव है)
- भक्ति योग – ईश्वर की भक्ति द्वारा मोक्ष
- कर्म योग – निष्काम कर्म द्वारा मोक्ष
- राज योग – ध्यान और समाधि द्वारा मुक्ति

मोक्ष प्राप्ति के साधन
मोक्ष प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित साधनों को अपनाने की आवश्यकता होती है:
- सत्संग और गुरु का मार्गदर्शन
- ध्यान और योगाभ्यास
- सदाचार और नैतिक जीवन
- अहंकार और आसक्तियों का त्याग
- सांसारिक मोह-माया से विमुक्ति
निष्कर्ष
मोक्ष केवल एक धार्मिक धारणा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति है जो व्यक्ति को शांति, आनंद और शाश्वत सत्य की ओर ले जाती है। जीवन का अंतिम लक्ष्य यही है कि हम आत्मा की वास्तविकता को पहचानें और मोक्ष की ओर अग्रसर हों।











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