ऑपरेशन बाम (Operation Baam) – BLA का एक साहसिक हमला |
✍️ दिनांक : 12 जुलाई 2025 | लेखन: Team of Boldvoices

परिचय:
पाकिस्तान के बलोचिस्तान क्षेत्र में बलोच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army – BLA) द्वारा हाल ही में चलाया गया “ऑपरेशन बाम (Operation Baam)” एक बार फिर पाकिस्तान के लिए सुरक्षा चिंता का बड़ा कारण बन गया है। यह ऑपरेशन पाकिस्तान की सैन्य चौकियों, खुफिया इकाइयों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर चलाया गया, और यह बलोच विद्रोहियों द्वारा अब तक के सबसे समन्वित और साहसी अभियानों में से एक माना जा रहा है।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि:
BLA एक प्रतिबंधित बलोच उग्रवादी संगठन है जो बलोचिस्तान के लिए स्वतंत्रता की मांग करता है। बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है, जो प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है लेकिन वर्षों से उपेक्षित और दमन का शिकार रहा है।
“ऑपरेशन बाम” 9 जुलाई से 11 जुलाई तक चला और इसका नाम ‘बाम’ (Baam) फारसी शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘उषा’ या ‘प्रभात’ (Dawn) — यह इस विचार को दर्शाता है कि बलोचिस्तान के लिए स्वतंत्रता की एक नई सुबह या नई शुरुआत की ओर यह कदम है।
हमले की रणनीति और लक्ष्य:
BLA ने इस ऑपरेशन में अपने विशेष दस्ते “Majeed Brigade” को लगाया। हमले के मुख्य लक्ष्य थे:
- पाकिस्तानी सेना की खुफिया इकाइयाँ (ISI की चौकियाँ)
- ग्वादर पोर्ट और उसके पास स्थित CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की परियोजनाएं
- फ्रंटियर कोर (FC) के बटालियन हेडक्वार्टर्स
- ब्लास्ट्स और ड्रोन हमलों के माध्यम से संचार प्रणालियों को बाधित करना
BLA ने एक साथ 84 स्थानों पर समन्वित हमला किया, जिसमें पंजगुर, तुरबत, ग्वादर, मस्तुंग, केच और कलात जिले शामिल थे। इन हमलों में विस्फोटकों, रॉकेट लॉन्चरों, स्नाइपरों और आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तानी प्रतिक्रिया:
पाक सेना और खुफिया एजेंसियां पहले तो हमलों से पूरी तरह चौंक गईं। इस हमले में कम से कम 50 पाकिस्तानी सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल था, मारे गए। जबकि दर्जनों घायल हुए। पाकिस्तान ने इसके बाद बलोचिस्तान में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं।
ISI और FC ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें कई निर्दोष नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया, जिससे जनता में असंतोष और बढ़ा।
BLA का उद्देश्य और संदेश:
BLA ने एक वीडियो स्टेटमेंट जारी कर ऑपरेशन की जिम्मेदारी ली और स्पष्ट किया कि यह हमला “बलोचों के हक और आज़ादी के संघर्ष” का हिस्सा है। उनका उद्देश्य था:
- पाकिस्तान और चीन द्वारा बलोच संसाधनों के दोहन को उजागर करना
- CPEC परियोजना के खिलाफ चेतावनी देना
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बलोचिस्तान में मानवाधिकार हनन की ओर आकर्षित करना
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:
हालांकि पाकिस्तान ने इसे “विदेशी समर्थन प्राप्त आतंकवाद” करार दिया, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बलोचिस्तान में जारी दमन और सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर #FreeBalochistan और #OperationBaam ट्रेंड करने लगे।
भारत में भी सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस ऑपरेशन को पाकिस्तान की विफल आंतरिक नीति और सैन्य कमजोरी का उदाहरण बताया है।
निष्कर्ष:
“ऑपरेशन बाम” सिर्फ एक हमला नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश था। यह दर्शाता है कि बलोच विद्रोही न सिर्फ मजबूत हो रहे हैं, बल्कि अब वे तकनीकी रूप से भी सक्षम हो चुके हैं। पाकिस्तान की सरकार और सेना को यह समझना होगा कि दमन की नीति अब विफल हो रही है। बलोच जनता के लिए विकास, अधिकार और सम्मान ही दीर्घकालिक समाधान हो सकते हैं।
भविष्य की दिशा:
- अगर पाकिस्तान बलोचों की मांगों को अनसुना करता रहा, तो ऐसे ऑपरेशन और तेज हो सकते हैं।
- CPEC जैसी परियोजनाएं खतरे में आ सकती हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान के संबंधों में भी तनाव आ सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलोचिस्तान का मुद्दा फिर से चर्चा में आ सकता है, खासकर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ में।












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