आध्यात्मिक लेख
✍🏻 Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in 🗓️ 2 जून 2025


“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”, यह चौपाई तुलसीदासजी की रामचरितमानस से ली गई है, जो जीवन के रहस्यों को अत्यंत सरल, किन्तु गूढ़ रूप में प्रकट करती है। यह वाक्य केवल धार्मिक या पौराणिक सन्दर्भ तक सीमित नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवन-दर्शन बन चुका है। इसमें ईश्वर की इच्छा, मनुष्य की सीमाएं—दोनों का अद्भुत समन्वय है।


🌿 अर्थ और मर्म

इस चौपाई का सरल अर्थ है—“जो कुछ होना है, वही होगा जो भगवान राम ने पहले से रच रखा है।” इसमें केवल भाग्यवाद नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समर्पण है।

यह उस विश्वास का प्रतीक है कि जीवन में घटने वाली हर घटना एक ईश्वरीय योजना का हिस्सा है—चाहे वह सुख हो या दुख, जय हो या पराजय।


🔮 कर्म बनाम भाग्य

कई लोग इस पंक्ति को सुनकर यह भ्रम पाल लेते हैं कि यदि सब राम ने तय कर दिया है, तो कर्म क्यों करें?
किन्तु गहराई से देखें तो यह चौपाई कर्म को निष्फल नहीं बनाती, बल्कि कर्म को भक्ति और समर्पण से जोड़ देती है।
रामचरितमानस के ही अन्य प्रसंगों में भी यह स्पष्ट होता है कि भगवान राम स्वयं युद्ध करते हैं, कठिनाइयों का सामना करते हैं—वो भी जानते हैं कि अंत क्या होगा, फिर भी वे प्रयास करते हैं।

इसका संदेश है—कर्म करो, पर फल की चिंता ईश्वर पर छोड़ दो।


🌾 जीवन में प्रासंगिकता

जब जीवन में संकट आए—नौकरी चली जाए, बीमारी आ जाए, संबंध टूट जाएं—तब यह चौपाई ढाल बन जाती है।
यह हमें कहती है—”यह सब उस कथा का हिस्सा है जो ईश्वर ने हमारे लिए रची है। अभी का दुख आगे किसी गूढ़ सुख का द्वार हो सकता है।”

जिस प्रकार माता सीता का हरण दुखद प्रतीत हुआ, लेकिन उसी से राम-रावण युद्ध हुआ और अधर्म का अंत हुआ।
इसलिए वर्तमान में जो हो रहा है, उसका अंतिम परिणाम हमें अभी ज्ञात नहीं—परन्तु जो हो रहा है, वह व्यर्थ नहीं।


🕊️ आध्यात्मिक शांति का संदेश

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा” हमें एक गहरे मानसिक और आत्मिक संतुलन की ओर ले जाता है।
यह हमें बार-बार याद दिलाता है कि—

  • नियंत्रण का मोह छोड़ो
  • हर परिस्थिति में ईश्वर की लीला देखो
  • आशा रखो, क्योंकि राम रचयिता हैं
  • विरोध नहीं, विश्वास अपनाओ

🌺 निष्कर्ष

यह चौपाई केवल भजन नहीं, एक जीने की शैली है। यह हमें सिखाती है कि हम साक्षी बनें उस लीला के, जो प्रभु ने रची है।
संघर्ष आएं, घाव मिलें, तो यह मानकर चलें—“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”—यही श्रद्धा, यही समर्पण, और यही सच्चा अध्यात्म है।


🙏 अंत में यही कहेंगे:
कर्म पथ पर अडिग रहो, परिणाम राम को सौंप दो।
क्योंकि जो भी होगा, वही होगा…
“जो राम रचि राखा”।


✍🏻 Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in 🗓️ 2 जून 2025

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