Date: 30 मई 2025 लेखक: Team of Boldvoices

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनके पुनर्वास के लिए एक समुचित नीति बनाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मीनू पुष्कर्णा की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया जिसमें 80 वर्षीय “डॉग अम्मा” के नाम से प्रसिद्ध प्रतिमा देवी ने दिल्ली के साकेत इलाके में अपने अस्थायी शेल्टर में 200 से अधिक आवारा कुत्तों की देखभाल करने की बात कही थी।
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि मौजूदा व्यवस्था के तहत केवल कुत्तों को नसबंदी व टीकाकरण के बाद फिर उन्हीं क्षेत्रों में छोड़ दिया जाता है। न्यायालय ने कहा कि यह तरीका न तो कारगर है और न ही टिकाऊ, खासकर तब जब शहर में कुत्तों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है और साथ ही काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने सरकार को निर्देशित किया कि वह एक व्यवहारिक और संवेदनशील समाधान की दिशा में आगे बढ़े, जो जनता की सुरक्षा और पशु कल्याण – दोनों का संतुलन बनाए रखे।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सरकार इस दिशा में दीर्घकालिक समाधान तैयार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनों के चलते आवारा कुत्तों को पूरी तरह हटाना या कैद करना आसान नहीं है। इसलिए सरकार अब एक ऐसा मंच बना रही है जिसमें आम नागरिकों और पशु प्रेमियों – दोनों की राय को शामिल कर संतुलित नीति तैयार की जाएगी।
अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 6 अगस्त 2025 तय की है और मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह नगर निगम और पशु कल्याण बोर्ड जैसे सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर इस नीति पर मसौदा तैयार करें।
यह कदम दिल्ली जैसे महानगर में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं को स्थायी रूप से हल करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, जिससे न केवल जनता को राहत मिलेगी बल्कि इन बेजुबान जानवरों के लिए भी एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जा सकेगा।












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