26 मई 2025 | नई दिल्ली, Boldvoices.in की टीम द्वारा संकलित

1. रोबोस्की नरसंहार (2011): निर्दोषों पर हवाई बमबारी
28 दिसंबर 2011 को तुर्की वायु सेना ने इराक-तुर्की सीमा के पास रोबोस्की गांव में 34 कुर्द नागरिकों को बमबारी में मार डाला। सरकार ने दावा किया कि वे उग्रवादी थे, लेकिन वे स्थानीय ग्रामीण थे। यह घटना आज भी कुर्दों के लिए गहरे जख्म की तरह है।
2. केलेक्ची गांव का विनाश (1992): सामूहिक विस्थापन
1992 में दीयारबकिर प्रांत के केलेक्ची गांव को तुर्की की सेना ने जमींदोज कर दिया, जिसमें 136 घर ध्वस्त हुए। इस विनाश ने सैकड़ों कुर्द परिवारों को बेघर कर दिया और गांव का अस्तित्व मिटा दिया।
3. ऑपरेशन हैमर (1997): सीमा पार तबाही
तुर्की की सेना ने इराकी कुर्दिस्तान में सैन्य अभियान चलाया, जिसमें हजारों कुर्द लड़े और मारे गए। यह अभियान कुर्दों के खिलाफ आक्रामक सैन्य नीति का प्रतीक बन गया।
4. 2019 का सैन्य आक्रमण: रासायनिक हमला और जनसंहार
तुर्की ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द क्षेत्रों पर हमला किया, जिसमें रासायनिक हथियारों के उपयोग के आरोप लगे। इस हमले में सैकड़ों नागरिक मारे गए और हजारों बेघर हो गए।
5. हवरिन खालफ की हत्या (2019): कुर्द नेतृत्व पर हमला
सीरियाई कुर्द नेता हवरिन खालफ को तुर्की समर्थित मिलिशिया ने बेरहमी से मार डाला। यह हत्या कुर्द नेतृत्व को निशाना बनाने की एक क्रूर मिसाल बन गई।
6. पत्रकारों और नेताओं की गिरफ्तारी (2022): आवाज़ों को कुचलने की साज़िश
तुर्की सरकार ने कुर्द पत्रकारों और राजनेताओं को आतंकवाद के नाम पर बंदी बना लिया। हजारों कुर्द राजनीतिक कार्यकर्ता जेलों में बंद हैं और कुर्द मीडिया को साइलेंस कर दिया गया है।
7. हेलीकॉप्टर घटना (2020): हिरासत में मौत
तुर्की की सेना ने दो कुर्द नागरिकों को हेलीकॉप्टर से नीचे फेंक दिया। उनमें से एक की मौत हो गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन की लहर उठी।
8. सांस्कृतिक विनाश और जबरन विस्थापन (1990 का दशक)
हजारों कुर्द गांवों को तुर्की सरकार ने खाली करवा कर जला डाला। लाखों कुर्द अपने ही देश में बेघर हुए। उनकी संस्कृति, बोली और परंपराएं मिटी जा रही हैं।
निष्कर्ष:
कुर्दों पर तुर्की द्वारा ढाए गए ये अत्याचार केवल कुछ घटनाएं नहीं, बल्कि एक लंबे और क्रूर इतिहास का हिस्सा हैं। यह जुल्म केवल गोलियों और बमों का नहीं, बल्कि पहचान, भाषा और जीवन के हर पहलू पर हमला है। अब समय आ गया है कि इस अन्याय पर दुनिया आंखें खोले और न्याय का सूरज उन पहाड़ियों पर भी उगे, जहां आज केवल राख और सिसकियां हैं।












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