
नई दिल्ली, 23 मई – कोटा में बढ़ती छात्रों की आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजस्थान सरकार से कड़े और साफ सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा, “आखिर ये बच्चे सिर्फ कोटा में ही क्यों जान दे रहे हैं?”
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आज का कोचिंग सिस्टम बच्चों को बहुत ज्यादा मानसिक दबाव में डाल रहा है। बच्चों को ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे वो सिर्फ नंबर लाने की मशीन हैं।
कोर्ट ने पूछा –
“क्या बच्चों को सिर्फ एग्ज़ाम पास करने की मशीन समझ लिया गया है?”
कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा कि उन्हें और कोचिंग सेंटरों को मिलकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर काम करना होगा। सिर्फ पढ़ाई नहीं, बच्चों की भावनाओं और तनाव को समझना भी ज़रूरी है।
राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि वो इस पर काम कर रही है और जल्द ही कुछ नए नियम बनाए जाएंगे। लेकिन कोर्ट ने इस पर नाराज़गी जताई और कहा, “केवल कागज़ों पर नियम बनाने से कुछ नहीं होगा, ज़मीन पर असर दिखना चाहिए।”
कोटा की सच्चाई क्या है?
कोटा हर साल लाखों छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए बुलाता है। लेकिन यहां का माहौल इतना तनाव भरा हो गया है कि कई छात्र दबाव में आकर आत्महत्या कर रहे हैं। 2025 में ही 14 छात्रों ने जान दे दी।
सुप्रीम कोर्ट ने आख़िर में कहा –
“हर बच्चा अनमोल है। एक एग्ज़ाम से किसी की ज़िंदगी की कीमत तय नहीं हो सकती। हमें अपनी पढ़ाई की व्यवस्था को और इंसानियत भरा बनाना होगा। “
अब इस मामले की अगली सुनवाई में राजस्थान सरकार को पूरी रिपोर्ट देनी होगी कि उन्होंने इस मुद्दे पर क्या किया है और आगे क्या करेंगे।












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