
नई दिल्ली, 23 मई – भारत सरकार ने गुरुवार को तुर्किए (पहले जिसे तुर्की कहा जाता था) और चीन को दो टूक अंदाज़ में यह याद दिलाया कि “आपसी संबंधों में एक-दूसरे की संवेदनशीलता का सम्मान बेहद ज़रूरी है।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह बयान हाल ही में दोनों देशों के कुछ ऐसे बयानों और कदमों के बाद दिया, जिन्हें भारत ने आपत्तिजनक और दखलअंदाज़ी माना।
क्या है मामला?
हाल ही में तुर्किए ने जम्मू-कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र में बयान दिया था, जिसमें उसने इसे विवादित क्षेत्र बताया। वहीं, चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताने की कोशिश की और कुछ भारतीय क्षेत्रों के नाम बदल दिए।
भारत ने इन दोनों घटनाओं को गंभीरता से लिया और अपने रुख को साफ करते हुए कहा कि ऐसे बयान और कदम ना सिर्फ भारत की संप्रभुता के खिलाफ हैं, बल्कि दोनों देशों के साथ भरोसे पर टिके रिश्तों को नुकसान पहुंचाते हैं।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:
“हमने तुर्किए और चीन को स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर वे भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, तो उन्हें हमारी संवेदनशीलताओं का सम्मान करना होगा — चाहे वो जम्मू-कश्मीर हो या अरुणाचल प्रदेश।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत किसी भी बाहरी टिप्पणी को स्वीकार नहीं करता जो उसके आंतरिक मामलों में दखल देती हो।
चीन को भी सीधी चेतावनी
जहाँ चीन की ओर से हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों को नए चीनी नाम देने की कोशिश की गई, भारत ने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
भारत ने कहा कि इस तरह के “नाम बदलने” के खेल से ज़मीनी हकीकत नहीं बदलती।
तुर्किए के लिए भी कड़ा रुख
तुर्किए की ओर से बार-बार कश्मीर पर टिप्पणी करने को भारत ने अनुचित करार दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि तुर्किए को भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है।
भारत ने दुनिया को एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं होगा — चाहे बात दोस्ती की हो या कूटनीति की। जो देश भारत से मजबूत रिश्ते चाहते हैं, उन्हें पहले भारत की संवेदनशीलताओं का सम्मान करना सीखना होगा।











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