राष्ट्रहित में एक आग्रह
Date : 20/05/2025 By Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in

भारत और पाकिस्तान के बीच वर्षों से चला आ रहा बीटिंग रिट्रीट समारोह एक सैन्य परंपरा के रूप में प्रसिद्ध है, परंतु आज यह केवल एक दिखावटी अनुष्ठान बन गया है, जो वास्तविकता से कोसों दूर है। इस पृष्ठभूमि में, हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से दृढ़तापूर्वक अनुरोध करते हैं कि इस समारोह को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए, क्योंकि इसकी कोई सार्थकता अब नहीं रह गई है।
प्रमुख कारण – अब कोई संबंध नहीं चाहिए
पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद का पालक और प्रायोजक राष्ट्र रहा है। मुंबई 26/11 हमलों से लेकर पुलवामा और पहलगाम जैसी घटनाओं तक, हमने अपने हजारों नागरिकों और वीर सैनिकों को खोया है। ऐसे राष्ट्र के साथ मंच साझा करना, चाहे वह कोई भी समारोह क्यों न हो, हमारे शहीदों के बलिदान का अपमान है।
इस समारोह के माध्यम से ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत और पाकिस्तान के बीच सौहार्द और सहमति का कोई स्वरूप है, जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान लगातार हमारे देश के खिलाफ सीमापार घुसपैठ, आतंकी प्रशिक्षण और जासूसी गतिविधियाँ चला रहा है। जब हम कूटनीतिक स्तर पर भी संबंध सीमित कर रहे हैं, तो ऐसा समारोह कृत्रिम मित्रता का मुखौटा क्यों ओढ़े?
यह समय भावनाओं में बहकर आयोजन करने का नहीं, बल्कि निर्णयात्मक राष्ट्रनीति अपनाने का है। एक ऐसा देश जो भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की मंशा रखता है, उसके साथ कोई भी संयुक्त परंपरा—भले वह सैन्य हो या सांस्कृतिक—राष्ट्र की गरिमा के प्रतिकूल है।
आज देश का आम नागरिक, विशेष रूप से शहीदों के परिजन, इस प्रश्न को लेकर व्यथित हैं कि जिस पाकिस्तान ने उनके अपनों को छीना, उस पाकिस्तान के साथ हम रोज़ शाम को मिलकर परेड क्यों करते हैं? राष्ट्र की आत्मा और जनभावना को समझना आवश्यक है।
आज का भारत आत्मनिर्भर, सशक्त और आत्मसम्मानी राष्ट्र है। हमें उन परंपराओं को त्यागना होगा जो पुरानी सहिष्णुता की मूर्खतापूर्ण मिसालें बन चुकी हैं। बीटिंग रिट्रीट अब राष्ट्र की सुरक्षा नीति और सैन्य प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है।
बीटिंग रिट्रीट जैसे आयोजन केवल तब तक स्वीकार्य थे, जब तक शांति की कोई आशा शेष थी। आज पाकिस्तान से कोई राजनयिक, सांस्कृतिक, सामाजिक या सैन्य संवाद की आवश्यकता नहीं है। यह देश हमारा शत्रु है, और एक सच्चा राष्ट्रवाद शत्रु को पहचानने और उससे पूरी तरह संबंध तोड़ने में ही निहित है।

प्रधानमंत्री जी से निवेदन है कि इस आयोजन को समाप्त कर एक स्पष्ट संदेश दिया जाए —
“भारत अब न कोई तमाशा करेगा, न तमाशा देखेगा।”
जय हिंद।
भारत माता की जय।











Leave a comment