Date : 15/05/2025 Editorial by Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices

क्या है चिकन नेक कॉरिडोर?
चिकन नेक कॉरिडोर को सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है। यह पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित एक संकरा इलाका है जो भारत के मुख्य हिस्से को उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों (अरुणाचल, असम, मिज़ोरम, मणिपुर आदि) से जोड़ता है।
यह गलियारा केवल 22 किलोमीटर चौड़ा है, और इसी से होकर रेलवे लाइन, सड़कें, पाइपलाइनें और फौजी सप्लाई जाती हैं।
इसे “चिकन नेक” इसलिए कहा जाता है क्योंकि नक्शे में यह एक पतली गर्दन जैसा दिखता है — और यही भारत की सबसे कमजोर कड़ी भी है।
भारत की सुरक्षा के लिए यह इतना अहम क्यों है?
1. सेना के लिए जीवन रेखा है
अगर इस कॉरिडोर को कोई दुश्मन (जैसे चीन या पाकिस्तान) बंद कर दे, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।
भारतीय सेना के लिए हथियार, रसद, भोजन, दवाइयाँ — सब कुछ यहीं से जाता है।
2. चीन की “डोकलाम नीति”
2017 में भारत और चीन की सेना डोकलाम में आमने-सामने आ गई थीं। डोकलाम भारत, चीन और भूटान के पास एक रणनीतिक जगह है जो चिकन नेक से महज़ कुछ किलोमीटर दूर है।
अगर चीन इस इलाके पर कब्ज़ा कर ले, तो वह आसानी से भारत का संपर्क पूर्वोत्तर से काट सकता है।
3. पाकिस्तान-चीन की मिलीभगत
पाकिस्तान और चीन की बढ़ती नज़दीकी भारत के लिए खतरा है। अगर दोनों मिलकर कोई योजना बनाएं, तो चिकन नेक पहला निशाना बन सकता है।
कॉरिडोर को चौड़ा करने के फायदे
1. सुरक्षा मज़बूत होगी
कॉरिडोर जितना चौड़ा होगा, वहाँ सैनिकों की आवाजाही और तैनाती उतनी ही आसान होगी।
सिर्फ एक रास्ता होने से खतरा बना रहता है। कई रास्ते होंगे तो आपात स्थिति में विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
2. दुश्मन को रोकना आसान होगा
चौड़ा इलाका होने से हमारी फौज को ज़्यादा जगह, संसाधन और तैयारी मिलेगी।
सीमाओं पर बंकर, रडार और मिसाइल सिस्टम लगाना भी आसान होगा।
चुनौतियाँ क्या हैं?
1. पर्यावरणीय समस्याएँ
यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों वाला है। ज़्यादा निर्माण से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
2. स्थानीय लोगों का विरोध
कुछ जगहों पर ज़मीन अधिग्रहण या विस्थापन का सवाल उठ सकता है।
3. राजनीतिक इच्छा शक्ति की ज़रूरत
सिर्फ योजना बनाना काफी नहीं — इसे ज़मीन पर उतारना, समय पर पूरा करना और सेना के साथ समन्वय बनाए रखना बेहद ज़रूरी है।
चिकन नेक और बांग्लादेश: क्या है संबंध?
भारत का चिकन नेक कॉरिडोर, यानी सिलीगुड़ी गलियारा, पश्चिम बंगाल के उत्तर में बांग्लादेश, नेपाल, और भूटान की सीमाओं के बहुत नज़दीक है। यह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है, लेकिन यह रास्ता बहुत पतला और संवेदनशील है।
बांग्लादेश, जो भारत का पड़ोसी और कभी भारत का हिस्सा रहा है (1971 से पहले), इस इलाके के बिल्कुल पास स्थित है। भारत यदि बांग्लादेश की ज़मीन से होकर रास्ता पा सके, तो न सिर्फ दूरी कम होगी, बल्कि चिकन नेक पर दबाव भी घटेगा।
बांग्लादेश से रास्ते मिलने के फायदे
1. वैकल्पिक मार्ग (Alternate Route)
अगर बांग्लादेश भारत को अपने क्षेत्र से होकर परिवहन की अनुमति दे, तो भारत चिकन नेक के एकमात्र रास्ते पर निर्भर नहीं रहेगा।
यह चीन या किसी संकट की स्थिति में एक बहुत बड़ा रणनीतिक सहारा बन सकता है।
2. दूरी और समय में कमी
अगर कोलकाता से असम जाना हो, तो अब सिलीगुड़ी होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। लेकिन अगर बांग्लादेश से होकर जाएँ, तो लगभग 40% दूरी कम हो जाती है।
3. सेना और रसद की तेजी से आपूर्ति
बांग्लादेश से होकर ट्रकों, ट्रेनों और अन्य आपूर्ति माध्यमों का जाना सैनिक तैयारी को और मज़बूत करेगा।
4. व्यापार और पूर्वोत्तर का विकास
बांग्लादेश से होकर रास्ता खुलने से न सिर्फ सेना को फायदा होगा, बल्कि पूर्वोत्तर के व्यापार, पर्यटन और रोज़गार को भी नई गति मिलेगी।
क्या बांग्लादेश तैयार है?
भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के वर्षों में रिश्ते अच्छे रहे हैं। कुछ समझौते भी हुए हैं, जैसे:
- मैत्री पुल और सड़कों का निर्माण
- रेल कॉरिडोर (अखौरा-त्रिपुरा रेललाइन)
- भारत-बांग्लादेश ट्रांजिट एग्रीमेंट
इनसे उम्मीद बढ़ी है कि बांग्लादेश अपनी ज़मीन भारत को ट्रांजिट के लिए देगा — शांति और साझेदारी की भावना से।
सुरक्षा की दृष्टि से सावधानी भी ज़रूरी
- बांग्लादेश की सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ की आशंका रहती है।
- चीन-पाकिस्तान जैसे देशों को यह नजदीकी खटक सकती है, और वे बांग्लादेश को भारत-विरोधी मोर्चे में घसीटने की कोशिश कर सकते हैं।
इसलिए सुरक्षा एजेंसियों, सीमावर्ती सैनिक बलों और कूटनीति को मिलकर काम करना होगा।
निष्कर्ष: चिकन नेक को मजबूत करना और बांग्लादेश को जोड़ना — दोनों ज़रूरी
भारत को दो स्तर पर काम करना होगा:
- भीतर से: चिकन नेक को चौड़ा और मज़बूत बनाना
- बाहर से: बांग्लादेश के साथ दोस्ती को रणनीतिक सहयोग में बदलना
जब एक रास्ता संकरा हो और दूसरा संभावनाओं से भरा — तो समझदारी यही कहती है कि दोनों को मज़बूत किया जाए।
चिकन नेक भारत की सुरक्षा की नस है, और बांग्लादेश उस नस को सांस देने वाला फेफड़ा बन सकता है — अगर रिश्तों की हवा सही दिशा में बहती रहे।
निष्कर्ष: भारत के लिए सुरक्षा का द्वार है चिकन नेक
भारत को अपने पूर्वोत्तर हिस्से को बचाए रखना के लिए और चीन जैसी ताकतों से मुकाबला करने के लिए चिकन नेक कॉरिडोर को चौड़ा और मजबूत बनाना बेहद ज़रूरी है।
यह सिर्फ एक सड़क या इलाका नहीं है — यह भारत की एकता, सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती की रीढ़ है।
एक पतली गर्दन पर खड़ा विशाल शरीर ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता — अब वक्त है उसे मजबूत कंधों में बदलने का।











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