Date : 15/05/2025 Editorial by Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices


भूमिका: बलूचिस्तान — जंजीरों में जकड़ा एक भूभाग

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, संसाधनों से भरपूर, परंतु लंबे समय से उपेक्षित और विद्रोह से ग्रस्त क्षेत्र है। यहां की आबादी सांस्कृतिक रूप से अलग, ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र स्वभाव की रही है। कई दशकों से बलूच राष्ट्रवादी गुट पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र राष्ट्र की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठता है — क्या भारत बलूचिस्तान को स्वतंत्र करा सकता है?


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • 1947 में विभाजन के समय बलूचिस्तान (विशेषकर खैरपुर, कलात जैसे राज्य) स्वतंत्र थे और उन्होंने पाकिस्तान में विलय का विरोध किया था।
  • 1948 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को बलपूर्वक अपने में मिला लिया, जिस पर अब तक वहाँ के लोगों में असंतोष कायम है।
  • पिछले 70 वर्षों में बलूच विद्रोह कई बार भड़का है — 1958, 1973 और 2004 में — और आज भी वहाँ अलगाववादी आंदोलन चल रहा है।

भारत की भूमिका और अवसर

1. नैतिक समर्थन

भारत, विशेषकर 2016 के बाद से, बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर वैश्विक मंचों पर आवाज़ उठाने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में बलूचिस्तान का उल्लेख कर एक नई कूटनीतिक दिशा का संकेत दिया था।

2. अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभाव

भारत बलूच आंदोलन को एक नैतिक और मानवीय मुद्दा बनाकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा सकता है।
जैसे बांग्लादेश के समय भारत ने पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से में मानवाधिकार मुद्दों को उठाया था, वैसे ही बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों की विश्वव्यापी निंदा कराई जा सकती है।

3. खुफिया और परोक्ष समर्थन

जैसे पाकिस्तान कश्मीर में छद्म युद्ध (proxy war) चला रहा है, वैसा ही भारत बलूच अलगाववादियों को गुप्त सहायता देकर कर सकता है — हथियार, प्रशिक्षण, संचार माध्यम और सूचना नेटवर्क के जरिए।


सामरिक और राजनीतिक चुनौतियाँ

1. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • भारत यदि खुलकर सैन्य या कूटनीतिक हस्तक्षेप करता है, तो उसे वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।
  • अमेरिका, रूस, चीन जैसे शक्तिशाली राष्ट्र किसी क्षेत्रीय युद्ध को रोकना चाहेंगे।

2. चीन की भूमिका

  • बलूचिस्तान में चीन का CPEC (चीन-पाक आर्थिक गलियारा) एक रणनीतिक परियोजना है।
  • यदि भारत वहाँ हस्तक्षेप करता है, तो चीन प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पाकिस्तान का समर्थन कर सकता है — जिससे क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति बन सकती है।

3. पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई

  • पाकिस्तान भारत में आतंकवाद को और अधिक बढ़ावा दे सकता है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर-पूर्व में।
  • पाकिस्तानी सेना और ISI बलूच आंदोलन को कुचलने के लिए और भी कठोर कदम उठा सकते हैं, जिससे आम बलूच नागरिकों पर दमन और बढ़ेगा।

बलूचियों की इच्छा और भारत की नीति

बलूच जनता की एक बड़ी आबादी स्वतंत्रता चाहती है, परंतु उनके पास एक एकीकृत नेतृत्व या अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं है। भारत को यदि उनके साथ खड़ा होना है, तो केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, मानवीय और राजनैतिक स्तर पर भी दीर्घकालिक सहयोग देना होगा।


निष्कर्ष: क्या यह संभव है?

तकनीकी रूप से — हाँ, भारत बलूचिस्तान को स्वतंत्र कराने में मदद कर सकता है, लेकिन…

यह कार्य केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय समर्थन, और बलूच जनता के विश्वास से ही संभव है। यह एक धीमी, परंतु रणनीतिक लड़ाई होगी — जिसमें भारत को अपने राष्ट्रहित और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों को संतुलित करना होगा।

बलूचिस्तान की मुक्ति एक स्वप्न हो सकती है, पर यदि भारत उसे अपनाए, तो उसे केवल तलवार नहीं, वाणी, संकल्प और रणनीति से भी लड़ना होगा।

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