दिनांक: 14 मई 2025 Curated by the team of Boldvoices

भारत का रक्षा क्षेत्र आज नए युग में प्रवेश कर चुका है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों ने रक्षा उत्पादन को न सिर्फ गति दी है, बल्कि भारत को एक रक्षा निर्यातक देश के रूप में भी स्थापित किया है।
📊 रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
- वर्ष 2013-14 में निर्यात: ₹686 करोड़
- वर्ष 2024-25 में निर्यात: ₹23,622 करोड़
🔹 34 गुना वृद्धि, जो बताती है कि भारत की रक्षा ताकत अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रही — वह अब वैश्विक मंच पर भी सराही जा रही है।
🚀 प्रमुख रक्षा निर्यातों में शामिल हैं:
🔸 ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile)
- भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस सुपरसोनिक मिसाइल की दुनिया भर में भारी मांग है।
- हाल ही में फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति के साथ भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य विश्वसनीयता बढ़ाई है।
- अन्य देश जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड भी अब रुचि दिखा रहे हैं।
🔸 पिनाका रॉकेट सिस्टम (Pinaka Multi Barrel Rocket Launcher)
- स्वदेशी रूप से विकसित यह प्रणाली लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है।
- कई देशों ने पिनाका सिस्टम में रुचि दिखाई है और बांग्लादेश व कुछ अफ्रीकी देशों के साथ बातचीत जारी है।
🔸 एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और सिमुलेटर
- लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस,
- AK-203 राइफलें,
- सर्विलांस उपकरण,
- और फ्लाइट सिम्युलेटर भी भारत की वैश्विक पेशकश में शामिल हैं।
🇮🇳 क्यों बढ़ा भारत का महत्व?
- उन्नत तकनीक और लागत प्रभावी समाधान
- तेजी से निर्माण और समय पर डिलीवरी
- सुरक्षा साझेदारियों में विश्वास और पारदर्शिता
🏁 निष्कर्ष:
भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और निर्यातक शक्ति भी बन चुका है। ब्रह्मोस मिसाइल और पिनाका जैसे सिस्टमों की वैश्विक मांग यह दर्शाती है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है।
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