📅 दिनांक: 09 मई 2025 ✍️ Curated by the Team of Boldvoices

S-400 ट्रायम्फ (जिसे NATO नाम देता है: SA-21 Growler) रूस द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (SAM system) है। इसे Almaz-Antey कंपनी ने डिज़ाइन किया है और यह 2007 से रूसी सेना के पास सेवा में है।
🔧 मुख्य विशेषताएं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अधिकतम मारक क्षमता | 400 किलोमीटर |
| लक्ष्य की ऊंचाई सीमा | 30 मीटर से 30 किलोमीटर तक |
| एक साथ लक्ष्यों पर हमला | 36 |
| एक साथ ट्रैक किए जाने वाले लक्ष्य | 80 |
| रडार रेंज | 600 से 1000 किलोमीटर तक |
| उपयोग | फाइटर जेट्स, क्रूज़ मिसाइल, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल |

🚀 S-400 की मिसाइलें:
S-400 एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलों से लैस होता है:
- 40N6E –
- रेंज: 400 किमी
- बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सकती है
- 48N6DM –
- रेंज: 250 किमी
- क्रूज़ और बैलिस्टिक दोनों प्रकार की मिसाइलों को गिरा सकती है
- 9M96E2 –
- रेंज: 120 किमी
- तेज़ गति से उड़ते टारगेट को मार गिराने में सक्षम
- 9M96E –
- रेंज: 40-60 किमी
- कम दूरी पर फाइटर जेट और ड्रोन को टारगेट करने के लिए

🛰️ रडार प्रणाली:
S-400 में कुल 4 तरह के रडार होते हैं जो मिलकर किसी भी दिशा से आने वाले हवाई खतरे को 1000 किलोमीटर पहले ही पहचान लेते हैं:
- 91N6E Big Bird Acquisition Radar
- 92N6E Grave Stone Engagement Radar
- 96L6 Cheese Board Radar
- 40V6MR/40V6M Mast Radars (ऊंचे इलाकों के लिए)
🇮🇳 भारत और S-400:
- भारत ने 2018 में रूस से 5 S-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था।
- इस डील की कीमत लगभग $5.43 बिलियन यानी ₹40,000 करोड़ थी।
- पहली यूनिट 2021 में भारत को मिल गई।
- 2022-2024 तक भारत को बाकी यूनिटें मिलती रहीं।
- यह प्रणाली अब भारत की वायु रक्षा का एक मुख्य स्तंभ बन चुकी है।
🛡️ S-400 बनाम अन्य सिस्टम:
| सिस्टम | देश | अधिकतम रेंज | तुलना |
|---|---|---|---|
| S-400 | रूस | 400 किमी | दुनिया का सबसे उन्नत SAM |
| Patriot PAC-3 | अमेरिका | 160 किमी | सीमित रेंज और सटीकता |
| THAAD | अमेरिका | 200 किमी (बैलिस्टिक पर) | केवल बैलिस्टिक मिसाइल के लिए उपयोगी |

🧠 निष्कर्ष:
S-400 ट्रायम्फ प्रणाली सिर्फ एक मिसाइल सिस्टम नहीं, बल्कि एक एयर डिफेंस नेटवर्क है। यह भारत जैसे देश के लिए, जहाँ चारों ओर सुरक्षा खतरे हैं, एक “गेम-चेंजर” है। इसकी सटीकता, दूरी और मल्टी-टारगेट क्षमता इसे दुनिया की सबसे खतरनाक एयर डिफेंस प्रणाली बनाती है।











Leave a comment