दिनांक: 7 मई 2025 रिपोर्ट प्रस्तुति: Team of Boldvoices


ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी शिविरों पर किया गया एक सुनियोजित और समन्वित सैन्य अभियान था। इस ऑपरेशन का उद्देश्य 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का प्रतिशोध लेना था, जिसमें 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक की जान गई थी।


🎯 उद्देश्य और रणनीति

  • भारत की तीनों सेनाओं – थल सेना, वायुसेना और नौसेना – ने मिलकर यह हमला अंजाम दिया।
  • हमलों का समय: तड़के 1:44 बजे से शुरू हुआ।
  • हमला केवल आतंकी ठिकानों पर केंद्रित रहा; पाकिस्तानी सेना के किसी भी ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

📍 निशाना बनाए गए प्रमुख आतंकी ठिकाने

  1. बिलाल कैंप, बहावलपुर – जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय
  2. मुरीदके, लाहौर के पास – लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य शिविर
  3. गुलपुर, PoK
  4. सवाई, PoK – LeT कैंप
  5. कोटली, PoK
  6. सरजल, PoK – JeM का शिविर
  7. महमूना, PoK – हिजबुल मुजाहिदीन का प्रशिक्षण केंद्र
  8. बरनाला कैंप, पंजाब प्रांत
  9. अहमद ईस्ट, बहावलपुर क्षेत्र – JeM की रणनीतिक इकाई

📢 आधिकारिक बयान और संकेत

  • भारतीय सेना ने बयान जारी करते हुए कहा: “Justice is served. Jai Hind!”
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस अभियान की निगरानी की और इसका नाम “सिंदूर” रखा।
  • नाम “सिंदूर” उन महिलाओं की पीड़ा को दर्शाता है जो पहलगाम हमले में अपने पति खो चुकी थीं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, सऊदी अरब और UAE के अपने समकक्षों को ऑपरेशन की जानकारी दी।

🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव और कई देशों के नेताओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की।
  • पाकिस्तान सरकार ने इसे भारत की तरफ से “युद्ध की कार्रवाई” बताया और बदला लेने की चेतावनी दी।

🛫 नागरिक जीवन और आर्थिक प्रभाव

  • भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में कई हवाई उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गईं।
  • पाकिस्तान के मुज़फ्फराबाद क्षेत्र में बिजली बाधित हुई।

🔍 निष्कर्ष

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सैन्य इतिहास में एक और साहसिक और निर्णायक क्षण के रूप में दर्ज हो गया है। यह न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की कड़ी नीति को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अब भारत केवल ‘आतंकी हमले झेलने वाला’ देश नहीं रहा, बल्कि वह जवाब देने में भी सक्षम है।


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