✍️ Curated by the team of Boldvoices.in 📅 दिनांक: 6 मई 2025

🗣️ प्रधानमंत्री का कथन:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बयान उत्तर भारत में एक रैली या सभा के दौरान दिया, जहां उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि भारत की नदियों का पानी अब केवल भारत के किसानों, नागरिकों और उद्योगों के काम आएगा। यह संकेत है कि भारत अपने जल संसाधनों को अधिक सशक्त रूप से प्रबंधित करेगा, खासकर उन नदियों के मामलों में जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से गुजरती हैं।
🌊 पृष्ठभूमि: भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद
- भारत और पाकिस्तान के बीच इंडस वॉटर ट्रीटी (सिंधु जल संधि) 1960 में हुई थी, जिसके तहत भारत ने अपने कुछ हिस्से के नदी जल का उपयोग सीमित कर दिया था।
- बीते वर्षों में पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद और सीमा उल्लंघन की घटनाओं के चलते भारत में इस संधि पर पुनर्विचार की मांग उठी।
- भारत के कई हिस्सों में जल संकट और किसानों की कठिनाइयों को देखते हुए सरकार अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है।
🇮🇳 बयान का उद्देश्य:
- किसानों को प्राथमिकता: भारत के किसान सिंचाई के लिए पानी की कमी झेलते हैं। यह निर्णय इस दिशा में राहत पहुंचाने वाला है।
- जल का राष्ट्रीय हित में उपयोग: अब भारत की सरकार उन परियोजनाओं को गति देगी जिससे नदियों का अधिकतम उपयोग भारत की ज़मीन पर हो।
- पड़ोसी देशों को स्पष्ट संदेश: यह बयान दर्शाता है कि भारत अब अपने अधिकारों को लेकर अधिक सशक्त रुख अपनाएगा।
✅ सरकार द्वारा संभावित कदम:
- नदी जोड़ परियोजनाएं (River Linking Projects) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- सिंचाई परियोजनाएं तेज़ी से लागू की जाएंगी।
- जल संरक्षण योजनाओं को ग्रामीण और शहरी स्तर पर सक्रिय किया जाएगा।
🧭 निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान केवल भावनात्मक या राजनीतिक नहीं, बल्कि नीतिगत और रणनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। यह भारत की जल-नीति को नया आकार देने और “पानी पर पहला हक अपने नागरिकों का” सिद्धांत को स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।












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