✍️ Curated by the team of Boldvoices.in, 📅 दिनांक: 6 मई 2025


🔆 क्या है “कृत्रिम सूर्य”?

“कृत्रिम सूर्य” एक वैज्ञानिक परियोजना है जिसमें पृथ्वी पर सूर्य जैसी ऊर्जा उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है। यह परियोजना न्यूक्लियर फ्यूजन (नाभिकीय संलयन) पर आधारित है, जो स्वच्छ, असीमित और टिकाऊ ऊर्जा का स्रोत हो सकता है।


🇮🇳 भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ

1. SST-1 टोकामक (गुजरात)

  • भारत का पहला सुपरकंडक्टिंग टोकामक, 2013 से सक्रिय।
  • हाल ही में, इसने 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक का तापमान प्राप्त किया, जो सूर्य के केंद्र से 20 गुना अधिक है।
  • भारत अब SST-2 नामक अगली पीढ़ी के फ्यूजन रिएक्टर की योजना बना रहा है, जिसका निर्माण 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

2. ITER परियोजना में भारत की भूमिका

  • भारत ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor) परियोजना में 10% योगदान दे रहा है, जिसमें उसने ₹17,500 करोड़ का निवेश किया है।
  • भारत ने इस परियोजना के लिए दुनिया का सबसे बड़ा क्रायोस्टैट (3,850 टन) गुजरात में निर्मित किया है, जो रिएक्टर को ठंडा रखने में मदद करता है।
  • हाल ही में, अमेरिका द्वारा विकसित केंद्रीय सोलिनॉइड मैग्नेट का परीक्षण पूरा हुआ है, जो अब असेंबली के लिए तैयार है।

The magnet was originally scheduled for completion in 2021. (Photo: ITER)

🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: चीन की उपलब्धियाँ

  • चीन के EAST (Experimental Advanced Superconducting Tokamak) रिएक्टर ने 1,066 सेकंड तक प्लाज़्मा को स्थिर रखा, जो एक नया विश्व रिकॉर्ड है।
  • इसने 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस का तापमान प्राप्त किया है, जो फ्यूजन रिएक्शन के लिए आवश्यक है।

The ITER Tokamak will be the largest device of its kind in the world. (Photo: ITER)

🔬 भारत की अन्य पहल: Aditya-L1 मिशन

  • ISRO का Aditya-L1 मिशन, भारत का पहला सौर अवलोकन मिशन है, जो सूर्य के कोरोना और सौर हवाओं का अध्ययन कर रहा है।
  • यह मिशन सूर्य की गतिविधियों को समझने और अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में मदद करेगा।

🧠 निष्कर्ष

भारत ने SST-1 के माध्यम से उच्च तापमान प्राप्त कर न्यूक्लियर फ्यूजन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ITER परियोजना में सक्रिय भागीदारी और Aditya-L1 मिशन के माध्यम से, भारत स्वच्छ और असीमित ऊर्जा स्रोतों की दिशा में अग्रसर है।


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