दिनांक : 1 मई 2025 | लेखक: Team of Boldvoices


भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का संग्रह अप्रैल 2025 में अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया है। इस महीने सरकार ने ₹2.37 लाख करोड़ की रिकॉर्ड GST वसूली की है। यह देश की अर्थव्यवस्था और कर प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।


📊 क्या है जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े:

  • कुल GST संग्रह: ₹2.37 लाख करोड़
  • पिछले साल अप्रैल 2024 की तुलना में वृद्धि: लगभग 12.4%
  • सीधे सरकार के खाते में (CGST + SGST): ₹1.92 लाख करोड़
  • सेटलमेंट और इंटरचेंज के बाद राज्यों और केंद्र के हिस्से में बांटवारा:
    • केंद्र सरकार को: ₹89,000 करोड़
    • राज्य सरकारों को: ₹93,000 करोड़

🔍 संग्रह में बढ़ोतरी के कारण:

  1. आर्थिक गतिविधियों में तेजी:
    व्यापार, उत्पादन और सेवा क्षेत्रों में तेजी से सुधार हुआ है, जिससे ज्यादा GST जमा हुआ।
  2. टैक्स चोरी पर सख्ती:
    सरकार ने फर्जी बिलिंग, गलत ITC क्लेम और अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रखी है।
  3. डिजिटल सिस्टम की मजबूती:
    ई-इनवॉइस, ई-वे बिल और रिटर्न फाइलिंग जैसे डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है।
  4. वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रीपेड टैक्स:
    कई कंपनियों ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत में एडवांस टैक्स भरा है, जिससे अप्रैल में संग्रह ज्यादा हुआ।

🧾 टैक्स संग्रह का वर्गीकरण:

टैक्स का प्रकारसंग्रह (₹ में)
CGST (केंद्रीय GST)₹42,650 करोड़
SGST (राज्य GST)₹44,880 करोड़
IGST (इंटरस्टेट GST)₹1.16 लाख करोड़
Cess (उपकर)₹33,470 करोड़

🏛️ क्या बोले वित्त मंत्रालय:

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा:

“यह कलेक्शन एक मजबूत और स्थिर आर्थिक ढांचे को दर्शाता है। आने वाले महीनों में भी हम सकारात्मक रुझान की उम्मीद कर रहे हैं।”


🌐 देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:

  • सरकारी योजनाओं को मिलेगी मजबूती:
    ज्यादा टैक्स संग्रह से सरकार की सामाजिक योजनाओं, बुनियादी ढांचे और सब्सिडी योजनाओं को समर्थन मिलेगा।
  • राज्यों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी:
    राज्यों को उनकी हिस्सेदारी समय पर मिलने से वे ज्यादा आत्मनिर्भर होंगे।
  • विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा:
    यह आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिरता का संकेत देते हैं, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

🧭 आगे की राह:

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर GST संग्रह इसी तरह बढ़ता रहा, तो सरकार को वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी और देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है।


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