By Gurdeep Singh, Senior Editor at boldvoices.in 📅 28 अप्रैल 2025


🔹 प्रस्तावना

वर्तमान समय में “आतंकवाद” (Terrorism) और “उग्रवाद” (Militancy) शब्दों का प्रचलन समाचार मीडिया, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा मामलों में आम हो गया है। लेकिन अक्सर इन दोनों शब्दों का प्रयोग एक-दूसरे के स्थान पर कर दिया जाता है, जिससे भ्रम पैदा होता है। वास्तव में, आतंकवाद और उग्रवाद के बीच महत्वपूर्ण वैचारिक, रणनीतिक और कानूनी अंतर मौजूद हैं।

आइए, इन दोनों अवधारणाओं को गहराई से समझते हैं।


🔹 आतंकवाद (Terrorism) क्या है?

परिभाषा:
आतंकवाद एक ऐसा कृत्य है जिसमें राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्दोष नागरिकों के खिलाफ भय, हिंसा और विनाश का सुनियोजित और संगठित तरीके से प्रयोग किया जाता है।

मुख्य लक्षण:

  • नागरिकों या निर्दोष लोगों को जानबूझकर निशाना बनाना
  • समाज में भय और अस्थिरता फैलाना
  • राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक मांगों को मनवाने के लिए दबाव बनाना
  • बड़े पैमाने पर मीडिया प्रचार द्वारा प्रभाव को बढ़ाना
  • सीमाओं के पार भी हमला करना (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद)

उदाहरण:

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमले
  • पुलवामा में CRPF काफिले पर आतंकी हमला
  • पहलगम, कश्मीर में अप्रैल, 2025 का आतंकी हमला
  • 9/11 अमेरिका वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमला
  • ISIS द्वारा मध्य पूर्व में किए गए हमले

🔹 उग्रवाद (Militancy) क्या है?

परिभाषा:
उग्रवाद आमतौर पर किसी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के समर्थन में हथियारबंद संघर्ष को कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अक्सर राज्य सत्ता या किसी विशेष नीति के खिलाफ विरोध दर्ज कराना होता है, लेकिन इसका पैमाना और तरीका आतंकवाद जितना व्यापक या निर्दोष नागरिकों को लक्षित करने वाला नहीं होता।

मुख्य लक्षण:

  • सरकारी संस्थानों या सुरक्षा बलों को निशाना बनाना
  • किसी विशेष क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दे को लेकर सशस्त्र संघर्ष
  • सीमित भौगोलिक क्षेत्र में सक्रियता
  • आम जनता को आमतौर पर जानबूझकर निशाना नहीं बनाना
  • कई बार राजनीतिक वार्ताओं के लिए रास्ता खुला छोड़ना

उदाहरण:

  • बलोचिस्तान में मानवअधिकारों तथा आज़ादी के लिए बलोच लिबरैशन आर्मी का संघर्ष

🔹 आतंकवाद और उग्रवाद में मुख्य अंतर

पहलूआतंकवाद (Terrorism)उग्रवाद (Militancy)
उद्देश्यभय के माध्यम से राजनीतिक/धार्मिक बदलाव लानासरकार या किसी नीति के खिलाफ सशस्त्र विरोध
निशानानिर्दोष नागरिक और आम जनतामुख्यतः सरकारी तंत्र या सुरक्षा बल
प्रभाव का दायराराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीयक्षेत्रीय या सीमित भूभाग में सीमित
रणनीतिभय और अराजकता फैलानासशस्त्र संघर्ष द्वारा दबाव बनाना
वैचारिक चरमपंथअत्यधिकवैचारिक परंतु प्रायः सीमित
उदाहरणअल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान देश (पाकिस्तान, आतंकी संगठनों को पालता है, पैसा, हथियार और ट्रैनिंग देता है। )बलोचिस्तान में बलोच लिबरेशन आर्मी

🔹 क्यों होता है भ्रम?

  • कई बार उग्रवादी संगठन आतंकवादी गतिविधियाँ भी कर बैठते हैं, जिससे इनकी पहचान धुंधली हो जाती है।
  • राजनीतिक कारणों से सरकारें या मीडिया शब्दों का चयन अपने हित में करती हैं। किसी समूह को “मिलिटेंट” कहने से संवाद की संभावना बचती है, जबकि “आतंकी” कहने से उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई को सही ठहराया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देश अपने Geo Political एजेंडे के अनुसार इन शब्दों का चयन करते हैं, जैसे चीन द्वारा पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में Veto करना और आतंकवादियों को Global Terrorist घोषित ना होने देना।

🔹 निष्कर्ष

आतंकवाद और उग्रवाद में स्पष्ट अंतर है, जो उनकी रणनीति, उद्देश्य और व्यवहार में दिखाई देता है।

  • आतंकवाद नागरिकों को निशाना बनाकर भय पैदा करता है।
  • उग्रवाद मुख्यतः सत्ता या नीतियों के खिलाफ सशस्त्र विरोध है।

लेकिन व्यवहार में कई बार ये दोनों प्रवृत्तियाँ आपस में मिल भी जाती हैं। इसलिए किसी भी घटना या समूह को उचित संदर्भ और व्यवहार के आधार पर सही शब्द से पहचाना जाना चाहिए।


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