Curated by the Team of Boldvoices, 📅 28 अप्रैल 2025


🔹 प्रमुख परिवर्तन

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में बड़े बदलाव किए हैं। इन संशोधनों के तहत मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी विषयों को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर प्राचीन भारतीय राजवंशों, ‘पवित्र भूगोल’, महाकुंभ मेला और आधुनिक सरकारी पहलों जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।


🔹 पाठ्यक्रम में जोड़े गए नए विषय

  1. प्राचीन भारतीय राजवंश:
    मगध, मौर्य, शुंग, सातवाहन जैसे पुराने भारतीय राजवंशों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली अतीत को उजागर करते हैं।
  2. पवित्र भूगोल:
    नए अध्याय में भारत और अन्य धर्मों के प्रमुख पवित्र स्थलों का वर्णन है, जैसे हिंदू तीर्थस्थल, बौद्ध स्थलों, सिख गुरुद्वारों, इस्लामी मस्जिदों, ईसाई गिरजाघरों तथा पारसी और यहूदी स्थलों का महत्व।
  3. महाकुंभ मेला:
    2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले पर विशेष जोर दिया गया है, जहाँ करीब 66 करोड़ श्रद्धालु शामिल हुए थे। इसे भारत की सांस्कृतिक एकता और श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है।
  4. सरकारी पहल:
    ‘मेक इन इंडिया’, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, और ‘अटल सुरंग’ जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं को भी पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है ताकि छात्र समकालीन भारत के विकास और सरकारी पहलों से परिचित हो सकें।
  5. भारतीय संविधान:
    भारतीय संविधान से जुड़ा नया अध्याय जोड़ा गया है जिसमें स्वतंत्रता पूर्व भारत में नागरिक अधिकारों की स्थिति और ध्वज फहराने जैसी गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है।

🔹 पाठ्यपुस्तक का नया प्रारूप

नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक का नाम ‘Exploring Society: India and Beyond’ रखा गया है। इस पुस्तक का पहला भाग प्रकाशित कर दिया गया है जबकि दूसरा भाग कुछ महीनों में जारी होने की उम्मीद है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हटाए गए इतिहास के विषय भविष्य में किसी अन्य भाग में जोड़े जाएंगे या नहीं।


🔹 पृष्ठभूमि

2022-23 में कोविड-19 महामारी के दौरान पाठ्यक्रम के सरलीकरण अभियान के तहत मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित कुछ अध्यायों को आंशिक रूप से कम किया गया था। अब 2025 में, इन विषयों को पूरी तरह से हटाते हुए भारतीय परंपरा, संस्कृति और आधुनिक सरकारी पहलों पर केंद्रित नए अध्याय जोड़े गए हैं।


🔹 निष्कर्ष

एनसीईआरटी के यह संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2023 के अनुरूप हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और समकालीन विकास को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल देते हैं। हालांकि, इन परिवर्तनों पर शैक्षणिक जगत और सामाजिक मंचों पर बहस भी शुरू हो गई है कि क्या इतिहास के संतुलित दृष्टिकोण को बरकरार रखा जा रहा है या नहीं।


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