Team of Boldvoices, 📅 28 अप्रैल 2025

🔹 रिपोर्ट का मुख्य बिंदु
विश्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2011 से 2022 के बीच 17 करोड़ (170 मिलियन) से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि भारत की आर्थिक विकास गति, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और सरकारी प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
🔹 गरीबी उन्मूलन में भारत की यात्रा
- 2011 में स्थिति:
वर्ष 2011 में भारत में बड़ी आबादी निर्धनता रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही थी। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और भी विकट थी। - 2022 तक प्रगति:
लगभग एक दशक में निरंतर आर्थिक विकास, सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, मुद्रा योजना, आयुष्मान भारत, और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना ने गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। - नवीनतम आंकड़े:
विश्व बैंक के अनुसार, भारत में अब गरीबी दर में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
🔹 गरीबी घटने के प्रमुख कारण
- तेज आर्थिक विकास:
भारत की तेज विकास दर ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाया और आय में वृद्धि की। - समावेशी नीतियाँ:
सरकार द्वारा चलाई गईं सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ जैसे कि उज्ज्वला योजना (रसोई गैस कनेक्शन), और डिजिटल इंडिया के तहत वित्तीय समावेशन ने गरीब तबकों तक सीधी सहायता पहुँचाई। - शहरीकरण और औद्योगीकरण:
छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को प्रोत्साहन मिलने से रोजगार में वृद्धि हुई और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन कर बेहतर जीवन स्तर प्राप्त करने का अवसर बढ़ा। - स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश:
स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच और शिक्षा क्षेत्र में सुधार ने दीर्घकालिक गरीबी उन्मूलन में मदद की।
🔹 कोविड-19 महामारी का प्रभाव
हालांकि 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण अस्थाई रूप से गरीबी में वृद्धि देखी गई थी, परंतु भारत ने महामारी के बाद रिकवरी में तेजी दिखाई और पुनः गरीबी उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रगति की। राहत पैकेज और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं ने गरीबों को इस कठिन समय में राहत प्रदान की।
🔹 वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत
- भारत का यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय माना जा रहा है।
- विश्व बैंक ने भारत की तुलना में कई अन्य विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन की गति को धीमा बताया है।
- भारत अब वैश्विक गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य (SDG 1: No Poverty) में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
🔹 निष्कर्ष
भारत का 17 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालना न केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी प्रमाण है। आने वाले वर्षों में, यदि यह रफ्तार बनी रहती है, तो भारत न केवल गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर सकता है, बल्कि वैश्विक विकास की एक प्रेरणा बन सकता है।











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