Team of Boldvoices, 📅 28 अप्रैल 2025

🔹 मुख्य खबर
भारत सरकार ने बीबीसी इंडिया की प्रमुख जैकी मार्टिन को एक औपचारिक विरोध पत्र भेजा है। यह कदम बीबीसी द्वारा हाल ही में हुई आतंकी हमले की रिपोर्टिंग में आतंकियों को “उग्रवादी” (militants) कहने के चलते उठाया गया है। भारत ने बीबीसी की इस शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे आतंकवाद को हल्के में लेना और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना बताया है।
🔹 विरोध का मुख्य कारण
- हाल ही में एक बड़े आतंकी हमले की रिपोर्टिंग के दौरान बीबीसी ने हमलावरों को “मिलिटेंट्स” (militants) कहा था, जबकि भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें स्पष्ट रूप से “आतंकवादी” (terrorists) करार दिया था।
- भारत का मानना है कि इस प्रकार की रिपोर्टिंग न केवल आतंकवाद को कमतर दर्शाती है, बल्कि वैश्विक समुदाय में गलत संदेश भी भेजती है।
🔹 विदेश मंत्रालय की सक्रियता
- भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की XP डिवीजन (External Publicity Division) ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
- XP डिवीजन अब बीबीसी की भारत में प्रसारित सामग्री की नियमित निगरानी करेगा ताकि भविष्य में इस तरह की रिपोर्टिंग पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
- भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए भी राष्ट्र की संप्रभुता, सुरक्षा और आतंकवाद पर स्पष्ट स्थिति से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
🔹 बीबीसी पर पहले भी विवाद
- बीबीसी की रिपोर्टिंग पहले भी कई बार भारत सरकार के साथ टकराव का कारण बन चुकी है।
- इससे पहले भी बीबीसी पर भारत विरोधी नैरेटिव फैलाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के आरोप लगे हैं।
- भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि ऐसी रिपोर्टिंग जारी रही, तो भविष्य में बीबीसी के खिलाफ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
🔹 निष्कर्ष
भारत सरकार का यह कदम न केवल बीबीसी को स्पष्ट संदेश देने के लिए है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि भारत अब अपने राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की गलत रिपोर्टिंग को अनदेखा नहीं करेगा।
आने वाले समय में बीबीसी समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं पर भी भारत की निगरानी और सख्त हो सकती है।











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