Curated by the Team of Boldvoices.in | 27 अप्रैल 2025

भारत और चीन के बीच लंबे समय से स्थगित कैलाश मानसरोवर यात्रा जून 2025 से पुनः आरंभ होने जा रही है। यह निर्णय दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, विशेष रूप से 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद उत्पन्न तनाव के परिप्रेक्ष्य में।
यात्रा का पुनः आरंभ और मार्ग
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा जून से अगस्त 2025 के बीच आयोजित की जाएगी। इस वर्ष, कुल 15 जत्थे, प्रत्येक में 50 तीर्थयात्रियों के साथ, दो मार्गों—उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला दर्रे—से यात्रा करेंगे। लिपुलेख मार्ग से 5 जत्थे और नाथू ला मार्ग से 10 जत्थे यात्रा करेंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध, जैन धर्मों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी मजबूत करती है।
कूटनीतिक पहल और संबंधों में सुधार
यात्रा के पुनः आरंभ की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और डेपसांग क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी पर सहमति जताई है। इसके अतिरिक्त, भारत और चीन ने सीधी उड़ान सेवाओं को पुनः शुरू करने, मीडिया और थिंक टैंक के बीच संवाद बढ़ाने, और सीमा प्रबंधन में सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः आरंभ भारत और चीन के बीच विश्वास बहाली और सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। यह पहल न केवल तीर्थयात्रियों के लिए एक शुभ अवसर है, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।











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