📅 26 अप्रैल 2025
✍️ Team of Boldvoices.in

रेलगन क्या है?
रेलगन एक अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है जो पारंपरिक बंदूकों के मुकाबले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बलों का उपयोग करके प्रक्षिप्त करता है। यह प्रणाली प्रक्षिप्त को उच्च गति (हाइपरसोनिक) तक पहुंचाने में सक्षम होती है, जिससे यह मिसाइलों और अन्य उच्च गति वाले लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकती है।
जापान का रेलगन विकास
जापान ने 2016 में रेलगन तकनीक के विकास की शुरुआत की थी। यह परियोजना जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) द्वारा संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य हाइपरसोनिक मिसाइलों और अन्य उच्च गति वाले लक्ष्यों के खिलाफ एक प्रभावी रक्षा प्रणाली विकसित करना है।
🚢 JS Asuka पर परीक्षण
जापान ने अपनी परीक्षण पोत JS Asuka (ASE-6102) पर रेलगन प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण अक्टूबर 2023 में समुद्र में किया गया था, जिसमें रेलगन ने 320 ग्राम वजनी 40 मिमी स्टील प्रक्षिप्त को 9,000 किमी/घंटा (Mach 7) की गति से प्रक्षिप्त किया। यह गति ध्वनि की गति से लगभग सात गुना अधिक है।
⚙️ प्रमुख विशेषताएँ
- प्रक्षिप्त की गति: 9,000 किमी/घंटा (Mach 7)
- प्रक्षिप्त का वजन: 320 ग्राम
- बैरल की लंबाई: 6 मीटर
- वजन: 8 टन
- ऊर्जा स्रोत: 5 मेगाजूल क्षमता वाला सुपरकैपेसिटर
- लक्ष्य: हाइपरसोनिक मिसाइलों और अन्य उच्च गति वाले लक्ष्यों का नाश
🌐 वैश्विक संदर्भ
अमेरिका ने 2021 में अपने रेलगन कार्यक्रम को उच्च लागत और सीमित रुचि के कारण बंद कर दिया था, जबकि चीन और रूस भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। जापान ने फ्रांस और जर्मनी के साथ मिलकर रेलगन प्रौद्योगिकी के विकास में सहयोग किया है।
🔮 भविष्य की दिशा
जापान का रेलगन प्रणाली भविष्य में समुद्री युद्धपोतों और तटीय रक्षा प्रणालियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह प्रणाली पारंपरिक मिसाइलों और तोपों के मुकाबले अधिक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है।
निष्कर्ष: जापान का रेलगन विकास तकनीकी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य के युद्धों में एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। यह प्रणाली न केवल जापान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाती है, बल्कि वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है।











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