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प्रकाशन तिथि: 25 अप्रैल 2025

🧒 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागूर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता का नाम यशोदा सावरकर था। कम उम्र में ही माता-पिता के निधन के बाद, उनके बड़े भाई गणेश सावरकर ने उनका पालन-पोषण किया।
सावरकर ने किशोरावस्था में ही राष्ट्रवादी विचारों को अपनाया और 1903 में अपने भाई के साथ मिलकर ‘मित्र मेला’ नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की, जो बाद में ‘अभिनव भारत’ के नाम से जाना गया।
📚 लंदन प्रवास और क्रांतिकारी गतिविधियाँ
1906 में सावरकर कानून की पढ़ाई के लिए लंदन गए। वहाँ उन्होंने ‘इंडिया हाउस’ में रहकर भारतीय छात्रों को क्रांतिकारी विचारों से प्रेरित किया। उन्होंने 1857 के विद्रोह पर ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने इसे भारत की पहली स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प्रस्तुत किया।
1909 में मदनलाल धींगरा द्वारा कर्जन वायली की हत्या के बाद, सावरकर को ब्रिटिश अधिकारियों ने गिरफ्तार किया और उन्हें दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
🏝️ कालापानी की सजा और रिहाई
सावरकर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सेल्युलर जेल में भेजा गया, जहाँ उन्होंने 1911 से 1924 तक कठोर कारावास भोगा। इस दौरान उन्होंने ‘हिंदुत्व’ का विचार विकसित किया और ‘Essentials of Hindutva’ नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने ‘हिंदू कौन है?’ का उत्तर देने का प्रयास किया।
1924 में उन्हें सशर्त रिहा किया गया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने का वादा किया था।

🕉️ हिंदुत्व और राजनीतिक विचार
सावरकर ने ‘हिंदुत्व’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने हिंदू पहचान को सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता के संदर्भ में परिभाषित किया। उन्होंने हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की वकालत की।
उनकी विचारधारा ने बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसे संगठनों को प्रभावित किया।
⚖️ गांधी हत्या और विवाद
1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद, सावरकर पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा। हालांकि, सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया।
उनकी भूमिका पर आज भी विवाद बना हुआ है—कुछ लोग उन्हें राष्ट्रवादी नायक मानते हैं, जबकि अन्य उन्हें विभाजनकारी विचारधारा का प्रवर्तक मानते हैं।
🕯️ निधन और विरासत
सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को मुंबई में हुआ। उनकी विरासत आज भी भारतीय राजनीति और समाज में चर्चा का विषय बनी हुई है।
उनके समर्थक उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और हिंदुत्व के प्रवर्तक के रूप में मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें सांप्रदायिकता और विभाजनकारी राजनीति का प्रतीक मानते हैं।
🎬 सांस्कृतिक प्रभाव
सावरकर के जीवन पर आधारित फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ 2024 में रिलीज़ हुई, जिसमें रणदीप हुड्डा ने मुख्य भूमिका निभाई।
फिल्म ने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया, लेकिन इसे कुछ समीक्षकों ने पक्षपाती और प्रचारात्मक भी बताया।
वीर सावरकर एक जटिल और बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, हिंदुत्व विचारधारा और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी विचारधारा और कार्य आज भी भारतीय राजनीति और समाज में प्रभावशाली हैं, और उनकी विरासत पर विमर्श जारी है।












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