लेखक: Team of BoldVoices
प्रकाशन तिथि: 25 अप्रैल 2025


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी के लिए कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने गांधी को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे “गैर-जिम्मेदाराना” बयान न दें, अन्यथा अदालत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है।

न्यायालय ने कहा, “हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कोई बयानबाजी बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगला कोई कहेगा कि महात्मा गांधी ब्रिटिशों के ‘नौकर’ थे।”

पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि महात्मा गांधी ने वायसराय को पत्र लिखते समय “आपका आज्ञाकारी सेवक” जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। इसके अलावा, राहुल गांधी की दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी सावरकर की प्रशंसा में पत्र लिखा था।

राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पेश होकर कानूनी राहत की मांग की। अदालत ने लखनऊ की एक अदालत द्वारा जारी समन पर रोक लगाते हुए कहा कि गांधी को आगे से ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।

यह मामला नवंबर 2022 में महाराष्ट्र के अकोला में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा सावरकर को “ब्रिटिशों का सेवक” कहने से जुड़ा है।


सार :
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बयान देने से पहले ऐतिहासिक तथ्यों को समझें और भविष्य में ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचें।

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