April 24 , 2025 | New Delhi | Curated by the team of Boldvoices.in 


📌 परिचय:

सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) भारत और पाकिस्तान के बीच हुई एक ऐतिहासिक जल-संधि है, जो 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षरित हुई थी। यह समझौता भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुआ।


🌊 सिंधु नदी प्रणाली:

सिंधु जल प्रणाली में कुल 6 प्रमुख नदियाँ आती हैं:

  1. सिंधु (Indus)
  2. झेलम (Jhelum)
  3. चेनाब (Chenab)
  4. रावी (Ravi)
  5. ब्यास (Beas)
  6. सतलुज (Sutlej)

इनमें से कुछ नदियाँ भारत से निकलती हैं और पाकिस्तान में बहती हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच जल के बंटवारे को लेकर यह समझौता किया गया।


📜 संधि के मुख्य बिंदु:

🔹 1. जल का बंटवारा:

  • पश्चिम की नदियाँ: सिंधु, झेलम, चेनाब → इनका ज्यादातर पानी पाकिस्तान को मिला।
  • पूर्व की नदियाँ: रावी, ब्यास, सतलुज → इनका पूरा पानी भारत को दिया गया।

🔹 2. उपयोग की सीमा:

  • भारत पश्चिम की नदियों का पानी सीमित रूप से सिंचाई, बिजली उत्पादन और घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन जल का भंडारण नहीं कर सकता।

🔹 3. नियंत्रण और तकनीकी सहयोग:

  • एक स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) बनाया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान से एक-एक प्रतिनिधि होता है। यह हर साल बैठक करता है और विवादों को सुलझाता है।

🧭 इतिहास और पृष्ठभूमि:

  • 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद जल का बंटवारा तय नहीं था।
  • 1948 में भारत ने पाकिस्तान को पानी की आपूर्ति रोक दी थी, जिससे तनाव बढ़ा।
  • इस स्थिति को हल करने के लिए विश्व बैंक ने मध्यस्थता की और दोनों देशों के बीच यह संधि बनी।

📊 महत्व और प्रभाव:

✅ सकारात्मक पहलू:

  • यह संधि अब तक किसी भी युद्ध और तनाव के बावजूद बनी हुई है, जिससे इसे विश्व की सबसे सफल जल संधियों में गिना जाता है।
  • पाकिस्तान को सिंचाई और पीने के लिए विश्वसनीय जल स्रोत मिला।
  • भारत को पूर्वी नदियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हुआ।

⚠️ आलोचना और विवाद:

  • कुछ भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को पश्चिम की नदियों पर अधिक अधिकार मिलने चाहिए थे।
  • पाकिस्तान ने कई बार भारत के बांधों और परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई है, जैसे कि बगलीहार और किशनगंगा प्रोजेक्ट।
  • हाल के वर्षों में भारत ने संकेत दिए हैं कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता रहा, तो संधि पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

📘 निष्कर्ष:

सिंधु जल संधि भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक शांति का पुल साबित हुई है। यह दिखाती है कि दो दुश्मन देश भी जल जैसे संवेदनशील संसाधनों का शांतिपूर्ण तरीके से बंटवारा कर सकते हैं। लेकिन बदलते समय में, इसकी प्रासंगिकता और भविष्य की दिशा पर नए सिरे से सोचने की जरूरत हो सकती है।


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