
🔹 परिचय:
अक्षय तृतीया को अक्ती या अक्षया तीज भी कहा जाता है। यह एक अत्यंत शुभ और पवित्र हिंदू पर्व है, जो वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व धन, सुख, समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है।
🔹 “अक्षय” शब्द का अर्थ:
“अक्षय” का अर्थ होता है – जो कभी क्षय (नाश) न हो। अर्थात् इस दिन किया गया दान, जप, तप, स्नान, पूजा, हवन, खरीददारी या कोई भी शुभ कार्य अनंत फल देने वाला माना जाता है।
🔹 पौराणिक मान्यताएँ:
- 🔸 भगवान विष्णु और परशुराम:
- इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
- 🔸 द्रौपदी को अक्षय पात्र प्राप्त होना:
- महाभारत काल में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को अक्षय पात्र दिया था, जिससे पांडवों को कभी भोजन की कमी नहीं हुई।
- 🔸 त्रेता युग का प्रारंभ:
- मान्यता है कि इस दिन त्रेता युग की शुरुआत हुई थी।
- 🔸 गंगा अवतरण:
- कुछ मान्यताओं के अनुसार, माँ गंगा का पृथ्वी पर आगमन भी इसी दिन हुआ था।

🔹 धार्मिक और सामाजिक महत्व:
- अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, भूमि पूजन, व्यवसाय आरंभ जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
- दान-पुण्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। विशेषकर जल दान, अन्न दान, वस्त्र दान, छाता, पंखा, चप्पल और सोना-चांदी दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
🔹 प्रमुख परंपराएँ:
- सोना खरीदना:
- इस दिन सोने-चांदी की खरीद को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समृद्धि का प्रतीक है।
- गृह प्रवेश और व्यवसाय शुरू करना:
- नए व्यापार, गृह निर्माण, दुकान की शुरुआत या जमीन खरीदने का उत्तम समय।
- विवाह:
- विवाह के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कई स्थानों पर इस दिन सामूहिक विवाह समारोह होते हैं।
- तीर्थ यात्रा और पवित्र स्नान:
- गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।
🔹 वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
अक्षय तृतीया के समय सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च राशि में होते हैं, जिससे धन और ऊर्जा का संतुलन उत्तम होता है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा से परिपूर्ण समय होता है, जो सकारात्मक कार्यों में सफलता देता है।
🔹 आधुनिक समय में अक्षय तृतीया:
आज के युग में लोग इस पर्व को धन निवेश, संपत्ति खरीददारी और जीवन के बड़े निर्णय लेने के रूप में देखते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल गोल्ड, और ई-सेवा दान जैसे नए रूपों ने परंपराओं को नया रंग दिया है।
📜 निष्कर्ष:
अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, शुभ कार्यों की प्रेरणा और समृद्ध जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सही समय पर किए गए प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे अक्षय होते हैं।











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