April 23 , 2025 | New Delhi | Curated by the team of Boldvoices.in


🧨 मामले की शुरुआत – हिंडनबर्ग रिपोर्ट (जनवरी 2023)

जनवरी 2023 में अमेरिका की शॉर्ट-सेलर कंपनी Hindenburg Research ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाए गए, जैसे:

  • स्टॉक मार्केट में हेरफेर (Stock Manipulation)
  • अकाउंटिंग में धोखाधड़ी (Accounting Fraud)
  • शेल कंपनियों के ज़रिए पैसा छिपाना

🔻 परिणाम:

  • अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
  • समूह का बाज़ार मूल्य (market cap) ₹12 लाख करोड़ से ज़्यादा घट गया
  • गौतम अडानी की व्यक्तिगत संपत्ति भी कई स्थान नीचे गिर गई

⚔️ अडानी का जवाब – ऑपरेशन ज़ेपेलिन (Operation Zeppelin)

इस रिपोर्ट के जवाब में अडानी समूह ने “ऑपरेशन ज़ेपेलिन” नाम का एक मजबूत काउंटर-प्लान शुरू किया, जिसमें शामिल थे:

🔹 1. कानूनी कार्रवाई

  • न्यूयॉर्क की अदालत (Southern District of New York) में Hindenburg और उसके संस्थापक नथान एंडरसन के खिलाफ केस तैयार किया गया।

🔹 2. जनसंपर्क रणनीति (PR strategy)

  • मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए अपने पक्ष को मजबूत किया गया।

🔹 3. राजनयिक और रणनीतिक निवेशक समर्थन

  • GQG Partners, TotalEnergies, Abu Dhabi की IHC जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अडानी में दोबारा निवेश किया जिससे निवेशकों का भरोसा बहाल हुआ।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी (जनवरी 2024)

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:

  • अडानी समूह के खिलाफ अब कोई नई जांच की ज़रूरत नहीं है।
  • SEBI की जांच संतोषजनक रही है।
  • अदालत ने केस की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका भी खारिज कर दी।

👉 गौतम अडानी ने कहा: “सत्य की जीत हुई है। अब हम भारत के विकास में और तेज़ी से योगदान देंगे।”


📈 बाज़ार में वापसी (2024-25)

  • शेयरों ने धीरे-धीरे वापसी की
  • निवेशकों का भरोसा फिर से बना
  • अडानी समूह ने ऊर्जा, पोर्ट्स, डेटा सेंटर और रक्षा जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से विस्तार किया

🏁 हिंडनबर्ग का अंत?

हालिया खबरों के अनुसार, Hindenburg Research ने अपनी गतिविधियां बंद कर दी हैं या बहुत सीमित कर दी हैं।
इसे अडानी समूह की “कंपनी और छवि” की एक निर्णायक जीत माना जा रहा है।


📝 निष्कर्ष:

  • यह मामला सिर्फ व्यापार या बाज़ार का नहीं था, यह भारत की प्रतिष्ठा और कॉर्पोरेट पारदर्शिता से भी जुड़ा था।
  • अडानी समूह ने एक व्यवस्थित रणनीति से न केवल कानूनी लड़ाई लड़ी, बल्कि बाज़ार और जनता के बीच अपनी छवि भी दोबारा स्थापित की।

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