April 22 , 2025 | New Delhi | Curated By the team of Boldvoices.in


📌 क्या था एंट्रिक्स-डेवास घोटाला?

यह घोटाला भारत की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) की एक व्यावसायिक शाखा Antrix Corporation और एक प्राइवेट कंपनी Devas Multimedia के बीच हुए एक अनुबंध (contract) से जुड़ा है।

इस सौदे में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम (space spectrum) को कम कीमत पर बेचने का आरोप लगा।


🧾 मुख्य तथ्य:

  • साल: 2005
  • अनुबंध: Antrix ने Devas को दो सैटेलाइट ट्रांसपोंडर (GSAT-6 और GSAT-6A) के माध्यम से S-band स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने की अनुमति दी।
  • समस्या: Devas को यह अधिकार बहुत कम कीमत पर मिला, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

क्या था घोटाला?

  • S-band स्पेक्ट्रम का उपयोग आमतौर पर सुरक्षा, रक्षा और दूरसंचार सेवाओं के लिए किया जाता है।
  • Devas को यह बैंड बिना पारदर्शी प्रक्रिया और कमर्शियल रेट से काफी कम दाम पर दे दिया गया।
  • Devas ने इसका फायदा उठाकर विदेशी निवेश भी हासिल कर लिया, जबकि ISRO और सरकार को नुकसान हुआ।

🕵️‍♂️ जांच और खुलासा:

  • 2011 में यह मामला सामने आया।
  • तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक उच्चस्तरीय जांच बैठाई।
  • इसके बाद सरकार ने 2011 में ही इस सौदे को रद्द कर दिया।

🔍 जिम्मेदार कौन था?

  • जी. माधवन नायर (तत्कालीन ISRO चेयरमैन): उन पर अनुबंध पर बिना उचित मंजूरी के हस्ताक्षर करने का आरोप लगा।
  • अन्य वरिष्ठ ISRO अधिकारी भी जांच के घेरे में आए।
  • CBI और ED ने जांच की और घोटाले में धोखाधड़ी, विश्वासघात और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए।

⚖️ क्या हुआ बाद में?

  • Devas ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया, यह कहते हुए कि अनुबंध गलत तरीके से रद्द किया गया।
  • कुछ फैसले Devas के पक्ष में आए और भारत सरकार को मुआवज़ा (compensation) देने का आदेश मिला।
  • 2021 में NCLT (National Company Law Tribunal) ने Devas को “धोखाधड़ी से बनी कंपनी” बताया और उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई।

📉 सरकार को कितना नुकसान हुआ?

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर Devas को स्पेक्ट्रम का कमर्शियल इस्तेमाल करने दिया जाता, तो हज़ारों करोड़ रुपये का नुकसान होता।


🧠 एंट्रिक्स-डेवास घोटाला क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह दिखाता है कि कैसे सरकारी संसाधनों का निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए दुरुपयोग किया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा।
  • यह घोटाला ISRO जैसी वैज्ञानिक संस्था की साख को भी प्रभावित करता है।

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