
भारत सरकार ने हाल ही में बांग्लादेश में चल रही कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं के लिए वादा की गई लगभग ₹5000 करोड़ की फंडिंग को रोक दिया है। इससे इन परियोजनाओं की गति रुक गई है और बांग्लादेश सरकार की चिंता बढ़ गई है।
🔧 प्रभावित परियोजनाएं और उनकी स्थिति
1. ढाका-टोंगी-जॉयदेबपुर रेलवे विस्तार परियोजना
- यह परियोजना बांग्लादेश की राजधानी को उपनगरीय क्षेत्रों से जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- अब तक सिर्फ 35% काम पूरा हुआ है।
- बीते 13 महीनों में केवल 1.5% प्रगति हुई है।
- देरी का मुख्य कारण: भारत से फंडिंग नहीं मिलना।
2. बोगुरा-सिराजगंज मिश्रित गेज रेलवे लाइन
- यह परियोजना अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
- अक्टूबर 2023 के बाद से भारतीय पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
- परियोजना की निविदा प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
3. कुलाउड़ा-शाहबाजपुर रेलवे लाइन
- इस परियोजना का 51% कार्य पूरा किया जा चुका है।
- लेकिन भारतीय तकनीकी स्टाफ और श्रमिकों की वापसी के कारण काम ठप हो गया है।
- यह लाइन भारत के साथ व्यापारिक कनेक्टिविटी के लिए अहम मानी जाती है।
🛑 फंडिंग रुकने के कारण
- नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की अनुपलब्धता:
बांग्लादेश को भारतीय एक्सिम बैंक से NOC नहीं मिला है, जो फंड रिलीज़ के लिए जरूरी है। - राजनीतिक अनिश्चितता और सुरक्षा कारणों से भारतीय श्रमिकों की वापसी:
हाल की अस्थिरता और चुनावी गतिविधियों के चलते भारतीय इंजीनियर व स्टाफ ने बांग्लादेश छोड़ दिया। - भारतीय अधिकारियों की निष्क्रियता:
बांग्लादेश सरकार द्वारा बार-बार पत्राचार के बावजूद भारत की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
📉 बांग्लादेश की प्रतिक्रिया
- बांग्लादेश सरकार ने भारत से स्थिति स्पष्ट करने और फंड रिलीज़ करने का अनुरोध किया है।
- वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की तलाश शुरू की जा चुकी है।
- बांग्लादेश में चिंता है कि इस कदम से भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर असर पड़ेगा।
🌐 व्यापक प्रभाव
- इन रेलवे परियोजनाओं का उद्देश्य भारत-बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना था, खासकर नॉर्थ ईस्ट भारत के लिए।
- फंडिंग रोकने से न केवल परियोजनाओं में देरी हो रही है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच भरोसे पर भी असर डाल सकता है।











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