April 21 , 2025 | New Delhi | Curated By the team of Boldvoices.in

88 वर्षीय पोप फ्रांसिस के निधन के साथ ही वेटिकन में नए पोप के चुनाव की परंपरागत और गोपनीय प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह पूरी प्रक्रिया बेहद शांति, अनुशासन और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ी होती है।
🏛️ 1. “Sede Vacante” – जब सिंहासन खाली होता है
पोप की मृत्यु के साथ ही वेटिकन में “सेडे वाकांते” (Sede Vacante) की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसका अर्थ है — पवित्र आसन खाली है। इस दौरान पोप की सभी आधिकारिक शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं और वेटिकन का कार्यभार कैमरलेन्गो (Vatican Camerlengo) के हाथों में होता है, जो पोप की मृत्यु की पुष्टि करता है और अगले चरणों की निगरानी करता है।
⚰️ 2. अंतिम संस्कार और शोक
- पोप की मृत्यु के बाद नौ दिनों का शोक काल (Novemdiales) मनाया जाता है।
- इस दौरान वेटिकन में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और पोप का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाता है।
- कार्डिनल्स धीरे-धीरे रोम पहुँचते हैं, ताकि कॉन्क्लेव की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
🗳️ 3. कॉन्क्लेव — नए पोप का चुनाव कैसे होता है
कॉन्क्लेव (Conclave) एक बेहद गोपनीय प्रक्रिया है जिसमें:
- केवल 80 वर्ष से कम आयु के कॉलिज ऑफ कार्डिनल्स (Cardinals) भाग लेते हैं।
- अधिकतम 120 कार्डिनल मतदान के पात्र होते हैं।
- कॉन्क्लेव सिस्टीन चैपल (Sistine Chapel) में आयोजित होता है और सभी कार्डिनल बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कट जाते हैं।
मतदान प्रक्रिया:
- हर दिन 4 बार गुप्त मतदान होता है (2 सुबह, 2 शाम को)।
- जब किसी एक कार्डिनल को दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है, तभी उसे पोप चुना जाता है।
🚬 4. धुएं का संकेत — काला या सफेद
- यदि किसी को बहुमत नहीं मिलता, तो सिस्टीन चैपल की चिमनी से काला धुआं (Black Smoke) निकलता है।
- जब नया पोप चुन लिया जाता है और वह अपना चुनाव स्वीकार कर लेता है, तो सफेद धुआं (White Smoke) उठता है — जो पूरी दुनिया को बताता है कि नया पोप मिल गया है।
👑 5. घोषणा और पहला दर्शन
- चयन के बाद नव-निर्वाचित पोप एक नया पापल नाम चुनता है।
- इसके बाद, सेंट पीटर्स बैसिलिका की बालकनी से “Habemus Papam” (हमारे पास एक पोप है) की घोषणा होती है।
- नया पोप पहली बार लोगों को आशीर्वाद देने सामने आता है।
✝️ निष्कर्ष
यह पूरी प्रक्रिया सैकड़ों सालों से चली आ रही एक धार्मिक परंपरा है, जो विश्वास, प्रतीकवाद और अनुशासन का अद्वितीय संगम है। पोप न केवल कैथोलिक चर्च का आध्यात्मिक नेता होता है, बल्कि वह दुनिया भर में शांति, करुणा और नैतिक नेतृत्व का प्रतीक भी होता है।











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