
तारीख: अप्रैल 2025
स्थान: एडिनबरा, स्कॉटलैंड
स्कॉटलैंड की संसद ने ‘हिंदूफोबिया‘ के खिलाफ एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। यह यूनाइटेड किंगडम की किसी भी संसद में इस विषय पर पारित किया गया पहला प्रस्ताव है। प्रस्ताव को अश रेगन (अल्बा पार्टी) ने पेश किया, जिसे विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ।
🔍 प्रस्ताव की मुख्य बातें:
- हिंदूफोबिया रिपोर्ट को मान्यता:
प्रस्ताव में ग्लासगो स्थित गांधीवादी पीस सोसाइटी की रिपोर्ट “हिंदूफोबिया इन स्कॉटलैंड” को मान्यता दी गई, जिसमें बताया गया कि कैसे स्कॉटलैंड में हिंदू समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह, भेदभाव और नफरत की घटनाएं बढ़ रही हैं। - हिंदू समुदाय की भूमिका की सराहना:
इसमें हिंदू समुदाय द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों, अंतर-धार्मिक संवाद और समरसता को बढ़ावा देने की कोशिशों की सराहना की गई। - सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा:
प्रस्ताव धार्मिक समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी समुदायों को समावेशी माहौल देने की बात करता है।
📉 रिपोर्ट में दर्ज घटनाएं:
- डंडी में मंदिर की दीवारों पर अपमानजनक ग्राफिटी।
- ग्लासगो में एक हिंदू परिवार पर नकाबपोश लोगों द्वारा पत्थरबाज़ी।
- एडिनबरा में एक हिंदू नर्स को बिंदी और चूड़ियाँ हटाने के लिए कहा गया और पदोन्नति से वंचित किया गया।
- ग्लासगो में एक शिक्षक को “आतंकवादी” कहा गया।
- हिंदू विरोधी अपशब्दों का उपयोग जैसे “गाय का मूत्र पीने वाला” और “शैतान उपासक”।
- 16% स्कॉट्स यह स्वीकारते हैं कि वे नहीं चाहेंगे कि उनके परिजन की शादी किसी हिंदू से हो।
🗣️ प्रतिक्रियाएं:
- गांधीवादी पीस सोसाइटी ने इस प्रस्ताव को “ऐतिहासिक” और धार्मिक समानता की दिशा में “मील का पत्थर” बताया।
- अश रेगन ने अपने भाषण में कहा:
“स्कॉटलैंड की विविधता उसकी ताकत है। लेकिन जब तक हम उन आवाज़ों को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे जो भेदभाव का सामना कर रही हैं, तब तक यह विविधता अधूरी है। यह प्रस्ताव केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ठोस परिवर्तन की ओर एक क़दम है।”
यह कदम न केवल स्कॉटलैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह उम्मीद जागी है कि अन्य देश भी धार्मिक समुदायों के खिलाफ हो रहे भेदभाव को गंभीरता से लेंगे।











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