
तारीख: 20 अप्रैल 2025
स्थान: अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज से जातीय भेदभाव समाप्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी हिंदुओं को ‘एक मंदिर, एक कुआं, एक श्मशान’ के सिद्धांत को अपनाकर सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना चाहिए।
🕊️ सामाजिक समरसता पर बल
मोहन भागवत ने कहा कि जातीय भेदभाव का कोई स्थान हिंदू समाज में नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे अपने घरों में सभी वर्गों के लोगों को आमंत्रित करें, उनके साथ भोजन करें, और समाज में एकजुटता का संदेश फैलाएं।
“हिंदू समाज को एकसाथ खड़ा होना होगा। समाज को जोड़ने के लिए हमें छोटे-छोटे काम करने होंगे, जैसे – सबके लिए एक ही मंदिर, एक ही कुआं और एक ही श्मशान।”
🏠 परिवार, परंपरा और संस्कार की भूमिका
भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मजबूत परिवार और अच्छे संस्कार, समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने पारंपरिक त्योहारों को सामाजिक समरसता के साथ मनाने का संदेश दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि:
“हमारी संस्कृति ने ‘सबका साथ, सबका सम्मान’ सिखाया है। यह समय है कि हम उस आदर्श को व्यवहार में लाएं।”
📢 स्वयंसेवकों को संदेश
भागवत ने आरएसएस स्वयंसेवकों से कहा कि वे हर गांव और बस्ती में जाकर जात-पात की दीवारों को तोड़ें और सामाजिक समरसता का भाव मजबूत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक यह भेदभाव खत्म नहीं होता, तब तक समाज की एकता अधूरी रहेगी।
🔚 निष्कर्ष
मोहन भागवत का यह बयान सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा नैतिक संदेश है। जब देश में विभिन्न सामाजिक चुनौतियाँ मौजूद हैं, तब इस तरह के विचार एक समावेशी और एकजुट समाज की ओर प्रेरित करते हैं।











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