April 20 , 2025 | New Delhi | Curated By the team of Boldvoices.in


उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है, विशेषकर दलित समुदाय के हितों की अनदेखी के आरोप में।


🔹 मायावती का बयान: “सपा को माफ़ करना असंभव”

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि “सपा को माफ़ करना असंभव है”।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में दलितों पर अत्याचार हुए हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।
साथ ही उन्होंने कांग्रेस और भाजपा पर भी आरोप लगाया कि इन दलों ने दलित समाज के उत्थान के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया।


🔹 दलित वोट बैंक पर सभी की नजर

उत्तर प्रदेश में करीब 21-22% दलित आबादी है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है।
भाजपा, सपा और कांग्रेस सभी दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश में लगे हैं:

  • भाजपा: दलित बस्तियों में संपर्क अभियान
  • सपा: ओबीसी, मुस्लिम और दलित गठजोड़
  • कांग्रेस: ‘दलित गौरव संवाद अभियान’

🔹 बसपा की रणनीति: संगठनात्मक मजबूती और दलित वोटों की वापसी

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा ना तो एनडीए से जुड़ी है और ना ही विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन से – ताकि पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनी रहे।
बसपा ने ‘कांशीराम चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे दलित समुदाय से संवाद करने की योजना बनाई है।


🔹 भविष्य की दिशा

मायावती की रणनीति स्पष्ट है – बसपा को दलितों का एकमात्र सच्चा प्रतिनिधि साबित करना।
इसके लिए पार्टी:

  • संगठनात्मक ढांचे को मजबूत कर रही है
  • जमीनी स्तर पर संपर्क बढ़ा रही है
  • दलित समुदाय के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक को लेकर संघर्ष तेज हो गया है, और मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि बसपा दलितों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी राजनीतिक दल से समझौता नहीं करेगी।

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