April 20 , 2025 | New Delhi | Curated By the team of Boldvoices.in

🔹 ओवैसी का विरोध और संसद में प्रदर्शन
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को मुस्लिम समुदाय पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने लोकसभा में इस विधेयक की प्रति फाड़कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और यह स्पष्ट किया कि जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा।
उनका आरोप है कि यह कानून मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर राज्य के हस्तक्षेप को बढ़ाता है, जिससे समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
ओवैसी ने इस अधिनियम की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनके साथ कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI), ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलेमा-ए-हिंद, DMK और अन्य संगठनों ने भी याचिकाएं दायर की हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं की सांझा सुनवाई के लिए केंद्र सरकार से एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी वक्फ संपत्ति को डीनोटिफाई, परिवर्तित या हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
🔹 देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
इस अधिनियम के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली, कोलकाता, फगवाड़ा (पंजाब), कटक (ओडिशा) और अन्य शहरों में मुस्लिम संगठनों ने इसे “असंवैधानिक” करार दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर कानून को वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्र, मौलाना, और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
🔹 AIMPLB की भूमिका
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 19 अप्रैल को हैदराबाद में एक बड़ी विरोध सभा का आयोजन किया, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी और AIMPLB के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने भाग लिया।
सभा में वक्ताओं ने इस कानून को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। AIMPLB का कहना है कि यह कानून वक्फ की स्वायत्तता को खत्म करता है।
🔹 निष्कर्ष
असदुद्दीन ओवैसी, AIMPLB और अन्य संगठनों का मानना है कि वक्फ संशोधन अधिनियम 2025, मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन में राज्य का हस्तक्षेप बढ़ाता है, जो भारत के संविधान के तहत मिलने वाले धार्मिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों का उल्लंघन है।
विरोधी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इसे कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चुनौती देने की ठानी है।











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