April 18 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in


राजधानी दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि फीस वृद्धि को लेकर हर स्कूल की गहन जांच की जाएगी और किसी भी स्कूल को बच्चों और अभिभावकों के साथ अन्याय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


📌 क्या बोले शिक्षा मंत्री?

आशीष सूद ने कहा:

“दिल्ली के किसी भी निजी स्कूल को मनमानी फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हम हर एक शिकायत को गंभीरता से लेंगे और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी। हर स्कूल की फीस संरचना की वित्तीय ऑडिट के जरिए जांच की जाएगी।”


🧾 अभिभावकों की शिकायतों पर ध्यान

हाल के दिनों में कई अभिभावकों ने स्कूलों द्वारा:

  • ट्यूशन फीस के अतिरिक्त ऐडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस वसूली
  • मिड सेशन में फीस बढ़ोतरी
  • स्कूल यूनिफॉर्म और किताबें विशेष दुकानों से ही लेने का दबाव

जैसी समस्याओं की शिकायत की है। इन सभी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग ने कहा है कि अब “वन नेशन, वन पॉलिसी फॉर स्कूल फीस” की तर्ज़ पर काम किया जाएगा।


🛑 सरकार के कदम

  1. सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस संरचना ऑनलाइन प्रस्तुत करने का निर्देश
  2. शिकायत के लिए जल्द ही विशेष पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा
  3. मनमानी फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी
  4. शिक्षा निदेशालय द्वारा बनाई गई जांच टीम हर स्कूल का निरीक्षण करेगी

💬 अभिभावकों को दिया आश्वासन

शिक्षा मंत्री ने कहा:

“बच्चों की शिक्षा के नाम पर कोई स्कूल लाभ कमाने का जरिया नहीं बन सकता। हमारी सरकार छात्रों और उनके परिवारों के हित में काम कर रही है। हर परिवार को न्याय मिलेगा।”


🔍 आगे की योजना

राज्य सरकार अब एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने पर विचार कर रही है, जिसमें:

  • हर स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी
  • स्कूलों की वित्तीय स्थिति और खर्च की भी नियमित समीक्षा होगी
  • शिक्षा को एक सार्वजनिक सेवा के रूप में परिभाषित किया जाएगा, न कि व्यापार

📌 निष्कर्ष

दिल्ली सरकार का यह सख्त कदम उन हजारों अभिभावकों के लिए राहत की खबर है जो वर्षों से निजी स्कूलों की बढ़ती फीस के बोझ से परेशान हैं। यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित की जा सकेगी।


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