
हाल ही में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने आगामी फिल्म ‘फुले’ को लेकर उठे विवाद पर ब्राह्मण समुदाय और सेंसर बोर्ड (CBFC) की कड़ी आलोचना की है। यह फिल्म समाज सुधारकों ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित है, जिसमें प्रतीक गांधी और पत्रलेखा मुख्य भूमिकाओं में हैं।
📌 विवाद की शुरुआत
फिल्म ‘फुले’ की रिलीज़ पहले 11 अप्रैल 2025 को निर्धारित थी। लेकिन ब्राह्मण समुदाय के कुछ संगठनों ने फिल्म में अपनी छवि को लेकर आपत्ति जताई, जिससे सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कटौती करने का निर्णय लिया और इसकी रिलीज़ को टालकर 25 अप्रैल कर दिया गया।
📣 अनुराग कश्यप का बयान
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“मेरी ज़िंदगी का पहला नाटक ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले पर था। भाई, अगर जातिवाद नहीं होता इस देश में, तो उनको क्या ज़रूरत थी लड़ने की? अब ये ब्राह्मण लोग को शर्म आ रही है या वो शर्म में मरे जा रहे हैं या फिर एक अलग ब्राह्मण भारत में जी रहे हैं जो हम देख नहीं पा रहे हैं।”
❗ सेंसरशिप पर सवाल
अनुराग कश्यप ने यह भी सवाल उठाया कि जब फिल्म अभी सेंसर बोर्ड में ही थी, तब कुछ संगठनों तक उसकी जानकारी पहले कैसे पहुँच गई? उन्होंने कहा:
“जब फिल्म सेंसरिंग के लिए जाती है, तो बोर्ड में चार सदस्य होते हैं। तब तक ये समूह और शाखाएं फिल्मों तक कैसे पहुंचते हैं, जब तक उन्हें पहुंच नहीं दी जाती? पूरा सिस्टम धांधली है।”
🧠 जातिवाद पर कड़ा रुख
कश्यप ने जातिवाद को लेकर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
“अगर जातिवाद नहीं है, तो फिर ब्राह्मण कौन हैं? क्यों उन्हें इस फिल्म से समस्या हो रही है? जब जातिवाद था ही नहीं, तो ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई क्यों थे?”
🎞️ फिल्म की वर्तमान स्थिति
फिल्म ‘फुले’ को अब 25 अप्रैल 2025 को रिलीज़ करने की योजना है, लेकिन विवादों और सेंसर बोर्ड की कटौती के कारण इसकी रिलीज़ पर संशय बना हुआ है। यह मुद्दा अब केवल एक फिल्म का नहीं, बल्कि भारतीय समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जातिगत सोच और सेंसरशिप के बड़े विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
🔚 निष्कर्ष
अनुराग कश्यप की बेबाक टिप्पणियाँ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। फिल्म ‘फुले’ को लेकर उठे सवाल सिर्फ एक समुदाय या व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक और वैचारिक बहस का रूप ले चुके हैं – जिसमें सिनेमा, समाज और राजनीति की जटिलताएँ उलझी हुई हैं।
April 18 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in











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