
🔍 परिचय
हैदराबाद के गचिबौली क्षेत्र में स्थित कंचा गचिबौली का नाम भले ही आम लोगों को अधिक ज्ञात न हो, लेकिन हाल ही में यह इलाका देश के सर्वोच्च न्यायालय की केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की रिपोर्ट के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। CEC ने इस क्षेत्र को “वन की सभी विशेषताओं से युक्त” बताया है और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है।
🌿 क्या है कंचा गचिबौली?
कंचा गचिबौली एक हरित पट्टी (Green Patch) है जो तकनीकी और आवासीय विकास से घिरे हुए गचिबौली क्षेत्र के बीच स्थित है। यह लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें प्राकृतिक पथरीली जमीन, स्थानीय पेड़-पौधे, झाड़ियाँ, और विविध जीव-जंतु पाए जाते हैं।
🧬 जैव विविधता का खजाना
CEC की रिपोर्ट के अनुसार, कंचा गचिबौली न केवल हरियाली से भरपूर है, बल्कि इसमें मौजूद स्थानिक और दुर्लभ प्रजातियाँ इसे एक पूर्ण वन के रूप में चिन्हित करती हैं। इसमें पाई जाने वाली प्रमुख जैव विविधताएँ:
- हैदराबाद ट्री ट्रंक स्पाइडर (Hyderabad Tree Trunk Spider): यह एक स्थानिक प्रजाति है जो केवल इसी क्षेत्र में पाई जाती है।
- भारतीय रोलर पक्षी (Indian Roller): तेलंगाना का राज्य पक्षी।
- चित्तीदार हिरण, साही, भालू के निशान, और अन्य छोटे स्तनधारी
- सैकड़ों प्राकृतिक औषधीय पौधों और पेड़ों की प्रजातियाँ
यह क्षेत्र संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनूठा उदाहरण है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच अपनी प्राकृतिक पहचान बनाए हुए है।

🏗️ विकास बनाम वन
हैदराबाद में तेजी से हो रहा शहरी विकास, विशेष रूप से आईटी कॉरिडोर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, कंचा गचिबौली जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों पर लगातार दबाव बना रहे हैं। कई निजी बिल्डरों ने इस भूमि को ‘निर्जन’ या ‘बेकार’ बताकर इसे अधिग्रहित करने का प्रयास किया।
हालांकि, CEC ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ तौर पर कहा है कि:
“यह क्षेत्र किसी भी दृष्टिकोण से खाली या निर्जन नहीं है। इसकी बनावट, जैव विविधता और पारिस्थितिकी इसे एक वास्तविक जंगल बनाती है।”
⚖️ कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
CEC की यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित एक याचिका का हिस्सा है जिसमें कंचा गचिबौली की भूमि पर निर्माण कार्य को चुनौती दी गई थी। समिति ने अदालत से आग्रह किया कि इस क्षेत्र को वन की परिभाषा के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
🛡️ संरक्षण की दिशा में अगला कदम
CEC की सिफारिशों के बाद अब यह तेलंगाना सरकार और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर निर्भर करता है कि वे:
- कंचा गचिबौली को “नोटिफाइड फॉरेस्ट” घोषित करें
- इसे बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट का दर्जा दें
- इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या आवासीय गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएँ
- यहां प्राकृतिक अनुसंधान और अध्ययन केंद्र स्थापित करें
🗣️ स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिक, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता इस फैसले से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय भविष्य के लिए एक मजबूत संदेश है कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा, शहरी विकास से भी अधिक ज़रूरी है।
एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा:
“यह जंगल हमारे बच्चों के लिए विरासत है, केवल बिल्डरों के मुनाफे का ज़रिया नहीं।”
📌 निष्कर्ष
कंचा गचिबौली अब सिर्फ एक हरियाली का टुकड़ा नहीं है। यह अब भारतीय न्यायिक तंत्र और पर्यावरण नीति के केंद्र में है। यदि इसे संरक्षित किया जाता है, तो यह एक मिसाल बनेगा कि किस प्रकार शहरीकरण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधा जा सकता है।
April 17 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in











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