रूस के सर्वोच्च न्यायालय ने आधिकारिक रूप से तालिबान को आतंकवादी संगठनों की सूची से हटा दिया है। यह प्रतिबंध 2003 से लागू था, जब रूस ने तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। हालांकि, 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण प्राप्त किया, तब से रूस ने उनके साथ संपर्क बनाए रखा और धीरे-धीरे संबंधों में नरमी आई।

रणनीतिक कारण

रूस का यह निर्णय क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के मद्देनज़र लिया गया है। मार्च 2024 में मॉस्को के पास एक भीषण आतंकवादी हमला हुआ था जिसमें 145 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान (ISIS-K) का हाथ था। इसके बाद रूस ने तालिबान को इस क्षेत्र में एक संभावित सहयोगी के रूप में देखना शुरू किया, क्योंकि तालिबान भी आईएसआईएस के खिलाफ सख्त है।

कूटनीतिक संबंध

हाल के वर्षों में रूस ने तालिबान के प्रतिनिधियों को कई क्षेत्रीय सम्मेलनों में आमंत्रित किया है। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर संवाद होता रहा है। रूस के अनुसार, यह कदम व्यावहारिक कारणों और अफगानिस्तान के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

रूस के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। अधिकांश देश अभी भी तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं देते हैं, खासकर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा तथा अधिकारों पर तालिबान की नीतियों के कारण। कई पश्चिमी देशों का मानना है कि तालिबान को मान्यता देने से पहले उन्हें अपने शासन को अधिक समावेशी और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला बनाना होगा।

निष्कर्ष

रूस का यह निर्णय तालिबान के साथ संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह देखा जाना बाकी है कि अन्य राष्ट्र इस निर्णय का किस प्रकार अनुसरण करते हैं, और तालिबान किस हद तक अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं को पूरा कर पाता है।


April 17 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in

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