नेशनल हेराल्ड घोटाला एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी मामला है, जिसमें कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं — सोनिया गांधी और राहुल गांधी — पर वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग, और राजनीतिक पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं।


📰 पृष्ठभूमि

  • नेशनल हेराल्ड एक अंग्रेज़ी दैनिक समाचार पत्र था, जिसकी स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
  • यह अख़बार Associated Journals Limited (AJL) के माध्यम से प्रकाशित होता था।
  • AJL ने वर्षों में देश के कई हिस्सों में संपत्तियाँ अर्जित कीं, लेकिन अखबार 2008 में आर्थिक संकट के कारण बंद हो गया।

📌 विवाद की जड़

  1. कर्ज़ और अधिग्रहण का मुद्दा:
    • कांग्रेस पार्टी ने AJL को लगभग ₹90 करोड़ का ब्याज-मुक्त ऋण दिया था।
    • वर्ष 2010 में एक नई कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76% हिस्सेदारी है।
    • YIL ने AJL के लगभग सारे शेयर अपने नियंत्रण में ले लिए।
  2. संपत्ति का स्थानांतरण:
    • AJL की देशभर में मौजूद संपत्तियाँ, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹2,000 करोड़ से अधिक है, अब YIL के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गईं।
    • आरोप है कि यह संपत्ति अधिग्रहण किसी समाचार पत्र के पुनरुद्धार के लिए नहीं, बल्कि निजी हित के लिए किया गया।
  3. राजनीतिक धन का दुरुपयोग:
    • कांग्रेस द्वारा पार्टी फंड का उपयोग निजी कंपनी को लाभ पहुँचाने में किया गया, जो राजनीतिक दलों के नियामक कानूनों का उल्लंघन माना गया।

⚖️ कानूनी कार्यवाही

  • 2012: भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दिल्ली की अदालत में आपराधिक शिकायत दायर की।
  • 2014: अदालत ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा (अब दिवंगत) सहित अन्य को समन जारी किया।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में जांच शुरू की और बाद में संपत्ति जब्ती की कार्यवाही भी शुरू की।
  • 2025: ED ने गांधी परिवार और यंग इंडियन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और AJL की ₹751.9 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं।

🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

  • कांग्रेस का पक्ष:
    • पार्टी ने इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।
    • पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
  • भाजपा का रुख:
    • भाजपा ने इसे “राजनीतिक भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” बताते हुए गांधी परिवार से इस्तीफे की माँग की।

📚 निष्कर्ष

नेशनल हेराल्ड केस भारतीय राजनीति में नैतिकता, पारदर्शिता और कानून के शासन की कसौटी बन चुका है।
यह घोटाला यह सवाल उठाता है कि क्या राजनीतिक दलों को जनता के पैसे का इस तरह निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने का अधिकार है।

मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है, और इसके फैसले का असर भारतीय राजनीति पर लंबे समय तक पड़ सकता है।


April 17 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in

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