वित्तीय वर्ष 2024–25 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, लेकिन इस दौरान व्यापार घाटा भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। इस रिपोर्ट में हम व्यापार के प्रमुख आंकड़े, कारण, प्रभाव एवं सरकार की नीतिगत पहल का विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।


🔢 FY25 में भारत–चीन व्यापार के मुख्य आंकड़े

  • कुल द्विपक्षीय व्यापार: $127.7 बिलियन
  • चीन से आयात: $113.45 बिलियन (पिछले वर्ष की तुलना में 11.5% वृद्धि)
  • चीन को निर्यात: $14.25 बिलियन (14.5% गिरावट)

📦 मुख्य आयात वस्तुएँ

  • इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद: मोबाइल, कंप्यूटर पार्ट्स, नेटवर्क उपकरण
  • लिथियम-आयन बैटरियाँ और सोलर पैनल
  • फार्मा API (दवा निर्माण हेतु कच्चा माल)
  • औद्योगिक मशीनरी

📤 मुख्य निर्यात वस्तुएँ

  • खनिज उत्पाद: लौह अयस्क, रफ डायमंड
  • कृषि उत्पाद: मसाले, सरसों का भोज्यशेष
  • इंजीनियरिंग वस्तुएँ

⚠️ व्यापार घाटे के प्रमुख कारण

  1. चीनी सामान पर उच्च निर्भरता
  2. चीन की आक्रामक कीमत नीति (डम्पिंग)
  3. भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा में कमी
  4. नए बाजारों में धीमी पहुँच

🎯 प्रभाव

  • मुद्रा पर दबाव और रुपये का अवमूल्यन
  • घरेलू विनिर्माण क्षेत्र पर नकारात्मक असर
  • आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में बाधा
  • रणनीतिक क्षेत्र (टेक्नोलॉजी, फार्मा) में विदेशी निर्भरता

🛠️ सरकार की पहलें

  • विशेष निगरानी इकाई की स्थापना
  • सुरक्षा शुल्क (Safeguard Duty) पर विचार
  • PLI योजना के तहत उत्पादन को प्रोत्साहन
  • आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण (चीन के विकल्प खोजना)

✅ निष्कर्ष

भारत-चीन व्यापार में निरंतर वृद्धि के बावजूद व्यापार घाटा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए भारत को घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना होगा, निर्यात को प्रोत्साहित करना होगा और दीर्घकालिक व्यापार रणनीति विकसित करनी होगी जिससे यह असंतुलन दूर किया जा सके।


April 17 , 2025 | New Delhi | By the team of Boldvoices.in

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