जब ज़रूरत होती है, तो भगवान मदद क्यों नहीं करता। इस सवाल ने अनगिनत लोगों को सोचने पर मजबूर किया है।
“भगवान है या नहीं?”, “अगर है, तो मदद क्यों नहीं करता?” — ये सवाल जीवन में कई बार हमारे मन में आता हैं, खासकर तब जब हम कठिनाई में होते हैं। जब दुख की घड़ी होती है, जब कोई अपना साथ छोड़ देता है, जब मेहनत के बावजूद असफलता मिलती है — ऐसे में भगवान से विश्वास डगमगाने लगता है।
1. भगवान को लेकर हमारी अपेक्षाएँ
हम अक्सर भगवान को एक जादूगर के रूप में देखते हैं — जो हमारी समस्याओं को पल भर में दूर कर देगा, हमारे दुख को हर लेगा, और हमारे लिए चमत्कार कर देगा। लेकिन यह सोच स्वाभाविक होते हुए भी अधूरी है। भगवान को समझना केवल लाभ और हानि के तराज़ू से नहीं हो सकता।
2. दुख और कठिनाइयाँ — जीवन का हिस्सा
धर्मग्रंथों में भी कहा गया है कि दुख और सुख दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं। श्रीमद्भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं:
“सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय को समभाव से सहन करो।”
भगवान ने हमसे यह वादा नहीं किया कि जीवन में कोई दुख नहीं होगा, बल्कि भगवान ने यह सामर्थ्य दिया है कि हम उन दुखों का सामना कर सकें।
3. भगवान मदद करता है — लेकिन कैसे?
भगवान की मदद हमेशा उस रूप में नहीं आती जैसी हम अपेक्षा करते हैं। कई बार वह:
- किसी व्यक्ति के माध्यम से हमारी सहायता करता है।
- हमें मानसिक शक्ति देता है कठिन समय में टिके रहने की।
- समय के साथ परिस्थिति को बदल देता है, लेकिन तुरंत नहीं।
सोचिए: जब आप बुरी स्थिति में थे और फिर किसी दोस्त ने आपकी मदद की, क्या वह सिर्फ संयोग था?
4. क्यों ज़रूरत है भगवान की?
- आस्था और मन की शांति: जीवन में हर चीज़ पर हमारा नियंत्रण नहीं है। भगवान में आस्था हमें मानसिक शांति देती है।
- नैतिकता और दिशा: धर्म और भगवान पर विश्वास हमें सही रास्ते पर बनाए रखने में मदद करते हैं।
- आशा का स्रोत: जब हर रास्ता बंद लगता है, भगवान में विश्वास एक उम्मीद की किरण देता है।
5. अगर ईश्वर न हो तो?
कल्पना कीजिए कि कोई भगवान नहीं है — तब क्या हम केवल भौतिकता और तर्क के आधार पर जीवन जी पाएंगे? शायद नहीं। इंसान केवल शरीर नहीं है, उसमें आत्मा, भावना और चेतना भी है — और भगवान उन्हीं का सहारा है।
निष्कर्ष:
भगवान कोई जादू की छड़ी नहीं है जो हमारी हर इच्छा पूरी कर दे। भगवान हमारे भीतर है, हमारे साहस, धैर्य और सद्गुणों में है। जब ज़रूरत होती है, भगवान हमें रास्ता दिखाता है — बस भगवान की उपस्थिति को पहचानने की आवश्यकता होती है।
April 16, 2025 | New Delhi | By Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in













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